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तीन माह में स्कूलों में लगेंगे सोलर प्लांट

5 वर्ष पहले
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भेल कार्पोरेट कार्यालय ने स्कूलो में सोलर प्लांट लगाने की मंजूरी दे दी है। भेल शिक्षा मंडल के द्वारा संचालित जवाहर सीनियर स्कूल, जवाहर प्रायमरी स्कूल, विक्रम सीनियर और विक्रम प्रायमरी स्कूल में लगने वाले इन प्लांट पर करीब 1 करोड़ 34 लाख रुपए का खर्च आएगा। जबकि 90 लाख रुपए की बिजली हर साल बचेगी।

भेल नगर प्रशासक प्रदीप मिश्रा के अनुसार कार्पोरेट ने तीन माह का वक्त दिया है। इन तीन माह में सोलर प्लांट काम करना शुरू कर देंगे। सोलर पैनल स्कूलों की छतों पर लगेंगे। इसके पहले भेल ने 20 लाख रुपए की लागत से यह लाइट वार्ड 62 के अंतर्गत छोटी खजूरी और रायसेन रोड स्थित आदमपुर में लगाई थीं। कार्पोरेट में जंबूरी मैदान पर लगने वाले सोलर प्लांट का भी प्रस्ताव है, जिससे हर माह 11 लाख यूनिट बिजली जनरेट होगी। यह सोलर प्लांट सबसे बड़ा 10 मेगावाट का होगा। नगर प्रशासक के अनुसार भेल में 88 लाख यूनिट(23.8 एमवीए) बिजली की खपत है। इसमें से कारखाने में 50 लाख यूनिट(15 एमवीए) व टाउनशिप में 38 लाख यूनिट(8.8 एमवीए) खर्च हो रही है। स्कूलो में प्लांट लगने के बाद इसमें से 90 लाख रुपए की कमी आ जाएगी। जंबूरी मैदान पर लगने वाले सोलर प्लांट पर करीब 70 करोड़ रुपए की लागत आएगी। स्कूल व जंबूरी मैदान पर लगने वाले सोलर प्लांट अत्याधुनिक होंगे, जो सूर्य की गति के अनुसार मूव करेंगे। सूर्यास्त के बाद यह वापस अपनी स्थिति में आ जाएंगे।

स्कूलो में बिजली कनेक्शन भी रहेंगे
सोलर प्लांट के साथ ही स्कूलो में बिजली कनेक्शन भी रखना जरूरी है, क्योंकि यह प्लांट 24 घंटे काम नहीं करता है। साथ ही अगर लगातार बरसात या बादल छाए रहने के समय भी बिजली की जरूरत रहेगी, लेकिन इसका खर्च काफी कम रहेगा। 90 लाख रुपए की करीब एक डेढ़ साल में ही सोलर प्लांट की कीमत वसूल हो जाएगी। स्कूलों के सभी कंपयूटर और लैब सोलर प्लांट की बिजली से ही रोशन रहेंगी। भेल अधिकारियों के अनुसार सोलर पैनल बैंगलोर यूनिट में बनते हैं। इसलिए इस पर खर्च कम ही रहता है। टाउनशिप या आसपास के अन्य स्कूल भी भेल से सहयोग ले सकते हैं। वैसे भी सरकार इस तरह की योजनाओं को प्रोत्साहित भी कर रही है।

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