नाटक, मंच संचालन में स्थापित नाम है कविता
सिंधी ड्रामा और मंच संचालन में एक स्थापित नाम है कविता इसरानी का। देश में सिंधी नाट्य निर्देशन में सक्रिय दो महिला निर्देशकों में एक नाम कविता का है। सिंधी नाटकों में केवल हास्य होता है इस सोच को बदल कर गंभीर नाटक देने की कोशिश कर रही हैं कविता। सिंधी कार्यक्रमों के मंच संचालन में देश में कविता की पूछ परख है। यूं तो बचपन से ही कविता की प्रतिभा को पर लगने लगे थे। तीसरी कक्षा में पहली बार अर्जुन का किरदार किया था। इसके बाद स्कूली लाइफ में जब भी मंच पर नाटक में बतौर कलाकार आईं तो लीड रोल किया। वर्ष 1994 में तीन सिंधी नाटकों के साथ थियेटर में कदम रखा तब से लगातार रंग कर्म की साधना में लगी हैं। कविता ने बताया कि सिंधु नाट्य समारोह में पहली बार नाटक करने का मौका परसो नाथानी ने दिया था। मैं ऐसे परिवार से बिलोंग करती हूं जिसमें नाटक में जाने का सोच भी नहीं सकती थी। वर्ष 1995-96 से इलेक्ट्राॅनिक्स मीडिया में सक्रिय हुई।
बतौर कलाकार
कविता ने विरासत, ग्राउंड फ्लोर, साह ने कहिड़ो भरबसो, अच्छी दाड़ी अटो खराब, भंभाराम भमूतीअ नारो, सेव जो टिफिन, उभ मा आई हूर है, ओ भाऊ दिसी हलजो, वारीय संदो कोटु नाटकों में बतौर लगाकर मंच पर अपनी भागीदारी की। विरासत (22शो), उम्रजी संझा, डेडी कूल पुटू फूल, उधारो घोटु, बाबे जी बेट पेटी, जाल उधारी, आत्माराम, अन्तर्यामी, दोही केरू, मर्दन अखिर समझो छोहे, पपन परी पुनावारी।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालन
इसके साथ ही हिन्दी-सिंधी कार्यक्रमों में मंच संचालन की शुरुआत की। शासकीय विभागों में बड़ी संख्या में कार्यक्रमों का संचालन किया। सिंधी मंच संचालन में अंतरराष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों में संचालन किया। मलेशिया के अंतरराष्ट्रीय सिंधी सम्मेलन का संचालन वर्ष 2014 में किया। दुबई, पाकिस्तान और देश में हुए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में अहमदाबाद, इंदौर में संचालन किया।
संतनगर की प्रतिभा