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बाहर खुलें ब्रिज की सीढ़ियां

5 वर्ष पहले
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मजबूरी में पैदल पटरी पार करते हैं लोग

वर्तमान में क्षेत्र के लोगों को जाना पड़ता है घूमकर

प्लेटफाॅर्म की सीढ़ियां बाहर की ओर करने की मांग उठी

पटरी पार की कॉलोनियों के लाेगों काे रोजाना हो रही है दिक्कत

एक से डेढ़ किलोमीटर चक्कर काटने की मजबूरी पटरी पार रहने वालों की सालों पुरानी समस्या है। महज एक ओर सीढ़ी खोलकर रेलवे इस समस्या का समाधान कर सकता है, लेकिन सालों से समस्या उठाए जाने के बाद भी इसके बारे में नहीं सोचा गया है। एक दशक में पटरी पार तेजी से कॉलोनियां आबाद हुई हैं, जिनमें रहने वालों का रोजाना संतनगर से आना जाना होता है। पैदल आने वालों की एक से डेढ़ किलोमीटर घूमकर आना मजबूरी बना हुआ है। इस समस्या का हल केवल रेल स्टेशन के फुटओवर ब्रिज की सीढ़ियांे को बाहर करने से हो सकता है, लेकिन इस दिशा में अभी तक कोई प्रयास नहीं हुए हैं।

बैरागढ़ स्टेशन पर एक नंबर प्लेटफाॅर्म से पटरी के उस पार जाने के लिए फुटओवर ब्रिज है, जिसका इस्तेमाल एक नंबर प्लेटफाॅर्म से दो नंबर पर आने-जाने वाले यात्री करते हैं, इससे पटरी के उस पार भी जाया जा सकता है, लेकिन पटरी के इस पार से उस पार जाने वालों के लिए ब्रिज एक बहुत बड़ी सुविधा बन सकता है। इसके लिए केवल ब्रिज की सीढ़ियां भोपाल स्टेशन की तर्ज पर वेस्ट रेलवे कॉलोनी बजरिया की ओर बनाए जाने की जरूरत है।

बैरागढ़ के लोगों का कहना है कि बैरागढ़ स्टेशन पर रिजर्वेशन सेंटर के पास सीढ़ियां खोली जा सकती हैं। अभी प्लेटफाॅॅर्म एक पर सीढ़ियां बंद हो जाती हैं। इसके चलते इसका इस्तेमाल पैदल लोग इधर से उधर जाने के लिए नहीं कर सकते। मजबूरी में पैदल पटरी पार करना पड़ता है।

रोज की जरूरत
संतनगर में पटरी के उस पार थ्री ईएमई सेंटर, बारह नंबर कैंप और नए एयरपोर्ट रोड पर बसी काॅलोनी में हजारों लोग रहते हैं, जिन्हें रोजमर्रा की आवश्यकता के लिए संतनगर आना पड़ता है। बिना रेलवे नियमों को तोड़े बैरागढ़ आने वालों के लिए फाटक रोड ही एक रास्ता है, जिससे एक से डेढ़ किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद आ जा सकते हैं। किराना, सब्जी जैसी जरूरतों के लिए पटरी के इस पार आने पर ही मिल पाती हैं। लंबा चक्कर न लगाना पड़े इससे बचने के लिए लिए लोग पटरी पार करके आते हैं।

रेलवे रिजर्वेशन भवन के साइड से बनाया जा सकता है रास्ता।

रेलवे स्टेशन पर बना फुटओवर ब्रिज, जिसका रास्ता बाहर से किए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

ऐसे तो अक्सर टूटते हैं नियम
जो लोग ब्रिज का इस्तेमाल करते हैं वह रेलवे नियमों का उल्लंघन करते हैं, क्योंकि प्लेटफाॅर्म पर बिना टिकट प्रवेश जुर्माने की श्रेणी में आता है। रेलवे की चैकिंग और आरपीएफ की कार्रवाई भी ऐसे लोगों पर होती है। ब्रिज का हिस्सा दूसरी ओर खोलने को लेकर रेल सुविधा संघर्ष समिति मांग रतलाम रेल मंडल में ज्ञापनों के माध्यम से उठाती रही है, लेकिन इस दिशा में कहीं भी किसी स्तर पर भी नहीं सोचा जा रहा है।

गौरतलब है कि फुटओवर ब्रिज के लिए बाहर से रास्ता होने से आसपास के रहवासियों को काफी फायदा होगा। पैदल आवाजाही करने वालों को स्टेशन पर पहुंचे बिना पटरी पार करने का सरल साधन मिल जाएगा।

पब्लिक प्राॅब्लम
समस्या से मिल सकती है निजात
जिस वक्त स्टेशन पर ओवर ब्रिज बनाया गया था, उस वक्त केवल स्टेशन के इस पार ही बसाहट थी। थोड़ी सी बसाहट उस पार होती थी, लेकिन न्यू एयरपोर्ट मार्ग पर जिस तरह कॉलोनियों का विकास हुआ है। रेल प्रशासन चाहे तो सुविधा उपलब्ध करा सकता है। -संतोष सेन, रहवासी

भोपाल में एक ओर से दूसरी ओर जाने के लिए ब्रिज पर सीढ़ियां हैं। ब्रिज से अंदर प्लेटफाॅर्मों पर जाया जा सकता है। बजरिया आने-जाने वाले भी ब्रिज का इस्तेमाल करते हैं। -विनोद पमनानी, रहवासी

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