नहीं हटे छतों पर लगे होर्डिग्स के स्ट्रक्चर
हाईकोर्ट के निर्देश पर छतों पर लगे होर्डिंग्स के स्ट्रक्चर को हटाने की कार्रवाई संतनगर में नहीं हुई। यहां मेन रोड और भीतरी इलाकों में कई बिल्डिंगों की छतों पर होर्डिंग्स के स्ट्रक्चर खड़े हुए हैं। इनमें से अधिकांश निगम की अनुमति के बिना लगाए गए हैं।
संत हिरदाराम नगर में मुख्य मार्ग सहित अन्य स्थानों पर लगे बड़े-बड़े होर्डिंग्स के गिरने का खतरा बना हुआ है।
बीआरटी कॉरिडोर के दोनों ओर सीहोर नाके से चुंगी नाके तक एक दर्जन से अधिक होर्डिंग्स छतों नजर आ रहे हैं। कई मकान मालिकों ने अपने स्तर पर विज्ञापन होर्डिंग्स लगवा लिए हैं, जिनसे हजारों की आय कर रहे हैं। कई घरों के मालिकों ने तो निगम को टैक्स जमा कराना तो दूर छतों पर विज्ञापन लगाने के लिए निगम से स्वीकृति भी नहीं ली। जानकारी के मुताबिक संतनगर में 90 प्रतिशत होर्डिंग्स अवैध रूप से लगे हैं। कई ऐसी इमारतों पर भी होर्डिंग्स नजर आ रहे हैं, जिनके पास बिल्डिंग परमिशन भी नहीं है।
कहां-कहां लगे हैं होर्डिंग्स
इमारतों, घरों और दुकानों की छत पर होर्डिंग्स उपनगर के टी वार्ड से ही दिखना शुरू हो जाते हैं। बस स्टैंड चौराहा, मुख्य मार्ग, स्टेशन रोड, संत कंवरराम चौराहा व कई जगहों पर विज्ञापन बोर्ड लगे हुए हैं।
कभी जांच तक नहीं हुई
होर्डिंग्स लगाने से पूर्व बिल्डिंग की क्षमता जांची जाती है। वजन सहने की क्षमता, बिजली के खंभों और तारों से टकराने के अलावा आवागमन तो प्रभावित नहीं हो रहा है आदि की जांच की जाती है।।
कोर्ट की अवमानना
कोर्ट के आदेश के बाद विज्ञापन तो हट गए हैं। लेकिन, स्ट्रक्चर खड़े हुए हैं। शहर में स्ट्रक्चर हटाने के लिए नगर निगम ने अभियान चलाया, जो लालघाटी इलाके में भी चला। लेकिन इसके आगे संतनगर इस कार्रवाई की जद में ही नहीं आया। यह कोर्ट की अवमानना है।
दूसरे चरण में हटेंगे स्ट्रक्चर
नगर निगम की होर्डिग्स के स्ट्रक्चर हटाने की कार्रवाई खत्म नहीं हुई है। पहला चरण खत्म हुआ है। छतों से भी होर्डिग्स हटाए जाने हैं। दूसरे चरण में होर्डिग्स स्ट्रक्चर हटाने का काम जल्द ही किया जाएगा।
-प्रेमशंकर शुक्ला, जनसंपर्क अधिकारी नगर निगम
कार्रवाई भी नहीं
अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई पूरे शहर में चल रही है, उपनगर में महज दिखावटी रही। निगम का अमला लालघाटी, हलालपुर तक के कब्जों को हटाकर लौट गया। यहां केवल चेतावनी देकर अमला चला गया था। जबकि पार्षद भी मानते हैं जोन में अतिक्रमण की स्थिति यह है कि शासकीय जमीन क्या, विश्रामघाट-कब्रिस्तान की जमीन पर भी कब्जे हैं। हाथ ठेलों के अस्थाई अतिक्रमण का हल तो निकलता नजर नहीं आ रहा है।