कॉलेज को नोटिस दिया तो करने लगे प्रताड़ित
सुसाइड नोट का मजमून
कॉलेज प्रबंधन पर प्रताड़ना का आरोप, जान देने की कोशिश
बोनीफाई कॉलेज के असिस्टेंट अकाउंटेंट ने खाईं नींद की गोलियां
रायसेन रोड स्थित बोनीफाई कॉलेज के असिस्टेंट अकाउंटेंट ने नींद की 12 गोलियां खाकर खुदकुशी की कोशिश की। यह कदम उठाने से पहले एकाउंटेंट ने छह पेज का सुसाइड नोट अपने दोस्त को वाट्सएप पर सेंड किया था। इसमें उन्होंने कॉलेज प्रबंधन पर प्रताड़ना और धमकाने का आरोप लगाया था। हालांकि, कॉलेज प्रबंधन ने इस मामले में मीडिया से कोई बात नहीं की है।
मूलत: आगरा निवासी 35 वर्षीय नरेंद्र शर्मा बोनीफाई कॉलेज में असिस्टेंट अकाउंटेंट हैं। वे प|ी संध्या के साथ भवानी धाम, नरेला शंकरी में रहते हैं। संध्या अपने मायके मुरैना गई हैं। सोमवार देर रात करीब दो बजे नरेंद्र ने कोलार रोड निवासी अपने दोस्त राजीव तिवारी को एक वाट्सएप संदेश किया। यह छह पेज का सुसाइड नोट था जो इमेज फार्मेट में था।
राजीव के मुताबिक मंगलवार सुबह नौ बजे उन्होंने यह सुसाइड नोट पढ़ा तो नरेंद्र को कॉल किया। तीसरे कॉल में फोन रिसीव हुआ। नरेंद्र बेसुध हालत में थे। इसके बाद राजीव ने नरेला शंकरी में रहने वाले अपने दो दोस्तों को फोन कर नरेंद्र के घर भेजा फिर कुछ देर बाद खुद भी वहां पहुंच गए। नरेंद्र के पास उन्हें दवा का एक खाली रैपर मिला, जो नींद की गोलियों का था। इसके बाद सभी नरेंद्र को लेकर रेडक्रॉस हॉस्पिटल आ गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें आईसीयू में भर्ती किया है। डॉक्टरों के मुताबिक उसकी हालत स्थिर है।
शिकायत करने में डर रहा था
राजीव ने बताया कि कॉलेज प्रबंधन द्वारा प्रताडि़त किए जाने की बात नरेंद्र ने कई बार बताई थी। हम दोनों के बीच इसे लेकर चर्चा भी हुई थी कि इसकी शिकायत पुलिस से कर दी जाए। लेकिन पता नहीं वह क्यों डरता था। वह होने वाले बच्चे की कसम खाता था और कहता था कि उसने कोई गबन नहीं किया है।
इस मामले में कॉलेज पहुंचकर और फोन पर पक्ष जानने की कोशिश की गई लेकिन प्रबंधन से कोई जवाब नहीं मिला। टीआई ने भी प्रबंधन का पक्ष जानने के लिए बुलवाया लेकिन कॉलेज कर्मचारियों के फोन आते रहे कि दस्तावेज लेकर जल्द आते हैं।
प्रबंधन ने नहीं दिया जवाब
जांच के बाद ही करेंगे कार्रवाई
अयोध्या नगर टीआई आशीष पवार के मुताबिक नरेंद्र के बयान दर्ज किए गए हैं। उन्होंने कॉलेज प्रबंधन पर प्रताड़ना और गबन में फंसाने का आरोप लगाया है। उनके आरोपों की जांच की जा रही है। साथ ही कॉलेज प्रबंधन के भी बयान दर्ज किए जाएंगे। इसके बाद ही कोई कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।
प|ी को लिखा - मुझे माफ कर देना संध्या
सुसाइड नोट में नरेंद्र ने प|ी संध्या से माफी मांगी है। लिखा है कि संध्या मुझे माफ कर देना। मेरे पास और कोई रास्ता नहीं बचा है। कहने को तो बहुत है पर इतना ही काफी है। अपना और हमारे बच्चे का ध्यान रखना। संध्या इन दिनों गर्भवती है। इसी कारण वह महीने भर पहले ही मायके गई है।
मैं नरेंद्र शर्मा उर्फ नवीन शर्मा पुत्र खेमचंद्र शर्मा कुछ बताना चाहता हूं। मुझे पिछले दो महीने से मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है। मुझ पर गबन करने का आरोप लगा रहे हैं। मैं बेकसूर हूं। मैं अपने परिवार या पापा का सिर झुकते नहीं देख सकता। कोई डीएड और बीएड की शिक्षण टीम आई थी। तो ये लोग फर्जी अध्यापक लाकर उनको कॉलेज की फैकल्टी बताते हैं। उनको पैसे दिए जाते हैं। ये सब साबित करने के लिए कॉलेज की डेली बुक मे इन सबकी एंट्री है। इनके रजिस्टर भी बनाए हैं मैंने और उस रजिस्टर में बच्चों के नाम व पैसों की पूरी जानकारी है। फीस पर मैंने बच्चों के हस्ताक्षर भी लिए हैं। इन लोगों ने डेली बुक और रजिस्टर मुझ से लेकर अपने पास रख लिए हैं। मुझे डर है कि ये लोग मुझे चोर साबित करने के लिए इन डेली बुक और रजिस्टर का गलत उपयोग कर सकते हैं।’
नरेंद्र के मुताबिक करीब डेढ़ महीने पहले उन्होंने कॉलेज से नौकरी छोड़ने के लिए नोटिस दिया था। इसके बाद से ही नरेंद्र को प्रताड़ित किया जाने लगा। कभी दस्तावेजों में कमी तो कभी गबन का आरोप लगाते थे। अपने आप को सही साबित करने की कोशिश में मैंने ये कदम उठाया है। उनका कहना है कि ये कदम उठाने के लिए मुझे डॉ. जीके अय्यर, ललिता अय्यर और सुनीता बिसारिया ने मजबूर किया।