शिक्षिकाओं की चाइल्ड केयर लीव नहीं होगी रद्द
स्कूलों की परीक्षाओं व प्रैक्टिकल से ठीक पहले 30 हजार से अधिक महिला शिक्षकों ने चाइल्ड केयर लीव (संतान देखभाल अवकाश) ले ली है। 20 हजार छुट्टियों के आवेदन पेंडिंग हैं। अकेले भोपाल जिले में ही 6000 महिला शिक्षकों में से 500 अवकाश पर हैं और इतने ही आवेदन चाइल्ड केयर लीव के लिए पेंडिंग हैं। इससे विभाग पसोपेश में है। इधर, भोपाल में निकला चाइल्ड केयर लीव रद्द करने का आदेश 24 घंटे में ही विभाग ने वापस ले लिया है।
डीईओ नेे 8 फरवरी को आदेश निकाला था कि जिन शिक्षिकाओं ने चाइल्ड केयर लीव ली है, वह निरस्त कर दी गई है। वे स्कूल प्राचार्य को रिपोर्ट करें, अन्यथा फरवरी का वेतन रोक दिया जाएगा। मंगलवार को आदेश को लेकर बवाल मचा तो बुधवार को प्राचार्यों की बैठक बुलाई। चाइल्ड केयर लीव का फीडबैक लिया गया। दोपहर बाद डीईओ ने संशोधित आदेश जारी किया कि जिन शिक्षिकाओं की छुट्टी मंजूर हो चुकी है, उसे रद्द न किया जाए। लेकिन 30 अप्रैल तक किसी अन्य महिला शिक्षक की छुट्टी मंजूर न की जाए।
साफ है कि भोपाल समेत प्रदेशभर में चाइल्ड केयर लीव के पेंडिंग करीब 20 हजार आवेदन पर फैसला मुख्य परीक्षाओं के बाद होगा। यदि बेहद जरूरी हुआ तो स्कूल प्राचार्य आवेदन जिले के शिक्षा अधिकारी को भेजेंगे। सभी पहलुओं व परीक्षा की जरूरत को देखने के बाद डीईओ इस पर निर्णय लेंगे।
माशिमं लगा चुका है एस्मा
एक मार्च से हायर सेकंडरी और दो मार्च से हाईस्कूल सर्टिफिकेट परीक्षाएं प्रारंभ हो रही हैं। इसे देखते हुए माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) सचिव डीएस सिंह ने 16 जनवरी को आदेश जारी कर ‘मप्र अत्यावश्यक सेवा संधारण तथा विच्छिन्नता निवारण अधिनियम 1979’ के प्रावधानों को लागू कर दिया था। इसी आधार पर गृह विभाग ने एक फरवरी से तीन माह तक के लिए ‘एस्मा’ लगा दिया।
चाइल्ड केयर लीव की आड़ में कई ऐसी शिक्षक भी हैं, जिन्होंने अकारण ही अवकाश ले लिया है। शिक्षा विभाग के सूत्रों का कहना है कि बैरसिया और नजीराबाद की कुछ शिक्षक हैं, जो छुट्टी लेकर भोपाल शहर में बैठी हुई हैं। उनके बच्चे स्कूलों में पढ़ रहे हैं। चूंकि ट्रांसफर नहीं हो रहा, इसलिए छुट्टी लेकर भोपाल में हैं। विभाग ऐसे लोगों की सूची तैयार कर रहा है।
नहीं दी जाएंगी नई छुटि्टयां
भोपाल में एक दिन पहले जो आदेश निकाला गया था, उसे संशोधित कर दिया गया है। प्राचार्यों और वरिष्ठ अधिकारियों से बात करने के बाद यह निर्णय लिया गया कि जिनकी चाइल्ड केयर लीव मंजूर हो चुकी है, वह निरस्त नहीं होगी। नई छुट्टियां नहीं दी जाएंगी। अत्यंत ही जरूरी हुआ तो आवेदन हमारे पास आएगा। - धर्मेंद्र शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी, भोपाल
बैरसिया के शिक्षक छुट्टी
लेकर भोपाल में बैठे