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बाल आयोग : न अध्यक्ष है न सदस्य, शिकायत करने वाले भटक रहे

5 वर्ष पहले
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राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग में अध्यक्ष व सदस्य न होने से पीड़ितों ने शिकायत करना ही बंद कर दिया। इसकी जगह आवेदक मानवाधिकार आयोग में शिकायत कर रहे हैं। बाल आयोग में दिसंबर 2014 से जनवरी 2016 तक केवल 128 शिकायत पहुंची। जबकि मानवाधिकार आयोग में पिछले एक साल में बच्चों से संबंधित 365 शिकायतें की गईं।

बाल आयोग में बच्चों के संबंध में होने वाली शिकायत का ग्राफ गिरता जा रहा है। जहां आयोग में अध्यक्ष व सदस्यों के रहते एक माह में पांच सौ प्रकरण दर्ज होते थे, वहीं एक माह में औसतन दस केस भी दर्ज नहीं हो रहे है। बाल आयोग की पूर्व अध्यक्ष उषा चतुर्वेदी का कहना है कि बच्चों के हितों को देखते हुए आयोग में जल्दी अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की जाना चाहिए। आयोग में दिसंबर 2014 से अध्यक्ष नहीं हैं। मानवाधिकार आयोग के अपर संचालक जनसंपर्क एलआर सिसोदिया का कहना है कि आयोग ने आवेदनों पर कलेक्टर से जांच रिपोर्ट मांगी है। चूंकि मामला बच्चों के हितों से जुड़ा है तो आयोग सभी मामलों पर गंभीरता से सुनवाई कर रहा है। मानवाधिकार आयोग में सौरभ कॉन्वेंट स्कूल की शिकायत करने वाले रामचरण का कहना है कि उनके बच्चे को फीस जमा करने में देरी होने के कारण स्कूल में बैठने नहीं दिया जा रहा। इस शिकायत लेकर बाल आयोग गया था,वहां पता चला कि आयोग में न अध्यक्ष हैं और न सदस्य इसलिए मानवाधिकार आयोग में शिकायत की।





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