रेत की कीमतों में आएगी गिरावट
अभी 22 से 25 हजार रुपए का मिल रहा रेत का ट्रक 10 से 15 प्रतिशत तक सस्ता हो सकता है। रेत की बढ़ती कीमतों पर रोक लगाने और मांग के अनुसार उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने हस्तक्षेप किया है। नई व्यवस्था के तहत नदियों में रेत खदानों की नीलामी प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। इससे अब पर्यावरण स्वीकृति 10 से 15 दिन में मिल जाएगी। इसमें अब तक छह महीने से लेकर साल भर तक का समय लगता था।
प्रदेश में पिछले साल पांच हजार मामले अवैध उत्खनन के सरकार के सामने आए थे। इनमें अधिकांश पर्यावरण स्वीकृति के बगैर उत्खनन के थे। इसके बाद केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने पांच हेक्टेयर तक की रेत की खदानों की पर्यावरण स्वीकृति देने के अधिकार डिस्ट्रिक्ट इन्वायरमेंटल इंपेक्ट असेसमेंट अथारिटी को (डिया) को दे दिए हैं। अभी तक ये सभी मामले स्टेट इन्वायरमेंटल इंपैक्ट असेसमेंट अथारिटी (सिया) के पास थे। केंद्र के फैसले के बाद सभी 51 जिलों में डिया के आॅफिस खुलने का रास्ता साफ हो गया है।
जिला स्तर पर गठित इस कमेटी के अध्यक्ष कलेक्टर होंगे और चार सदस्य होंगे। इसके अलावा 11 टेक्निकल मेंबर भी होंगे जो नदियों में पांच हेक्टेयर से कम की खदानों की नीलामी की पर्यावरण स्वीकृति देंगे। पांच हेक्टेयर से ज्यादा की रेत खदानों के मामले पहले की तरह ही सिया के पास आएंगे।
यह रही वजह
बीते साल 2015 में लागू हुए एमएमआरडी एक्ट के अनुसार पर्यावरण स्वीकृति के अधिकार प्रदेश स्तरीय सिया के पास थे। इससे जिलों से सभी मामले राज्य स्तरीय समिति के पास आते थे, जहां छोटी रेत खदान की स्वीकृति में भी छह महीने से साल भर का समय लग रहा था। इस व्यवस्था को सरल बनाने के लिए पर्यावरण स्वीकृति देने के नियमों में संशोधन किया गया है।
सरकार की आय भी बढ़ेगी
सरकार को गौण खनिजों जिसमें रेत, गिट्टी और मुरम से बीते साल 850 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ था जिसमें से 500 करोड़ रुपए रेत खनन की रायल्टी के थे। खनिज विभाग के एक अफसर का कहना है कि जिलों में ही पर्यावरण स्वीकृति की नई व्यवस्था लागू होने से सरकार के राजस्व में आगामी साल में करीब 200 करोड़ रुपए का राजस्व का फायदा होगा।
प्रदेश के सभी 51 जिलों में रेत (गौण खनिज) की पांच हेक्टेयर तक की खदानों को पर्यावरण स्वीकृति स्थानीय स्तर पर ही मिलेगी। जिलों में डिया के कार्यालय जल्द ही खोले जाएंगे। इससे निश्चित रूप से ज्यादा मात्रा में रेत उपलब्ध होगी, जिससे कीमतों में भी कमी आएगी। अजातशत्रु श्रीवास्तव, सदस्य सचिव, सिया