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आईटी पार्क के लाभ से मेंटेनेंस

5 वर्ष पहले
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रहवासियों से मिलकर प्लानिंग
हरियाली बचाकर भी बन सकती है स्मार्ट सिटी
इंफ्रास्ट्रक्चर रिपोर्टर | भोपाल

शिवाजी नगर में स्मार्ट सिटी बनाने के साथ पेड़ भी बचाए जा सकते हैं। स्मार्ट सिटी को इस तरह डिजाइन किया जा सकता है जिसमें मौजूदा हरियाली के साथ सड़क और अन्य सुविधाओं का इस्तेमाल किया जा सके। यहां बनने वाले आईटी पार्क की आय से यहां की सुविधाओं का रखरखाव भी किया जा सकता है।

यह बात पुणे की मगरपट्टा सिटी के वाइस प्रेसिडेंट माणिक शर्मा ने दैनिक भास्कर से चर्चा में कही। शर्मा इंस्टीट्यूट ऑफ टाउन प्लानर्स ऑफ इंडिया के मप्र चैप्टर द्वारा आयोजित संवाद में हिस्सा लेने आए थे। संवाद का विषय था ‘टाउन डेवलपमेंट स्कीम्स : अ वे फाॅरवर्ड’। पुणे म्युनिसिपल कार्पोरेशन एरिया में 450 एकड़ क्षेत्र में विकसित हुई मगरपट्टा टाउनशिप स्मार्ट सिटी का एक उदाहरण है। मगरपट्टा सिटी को लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में शामिल किया गया है। महाराष्ट्र सरकार सहित कई अन्य संस्थाओं ने मगरपट्टा सिटी को अवार्ड दिए हैं। शर्मा बताते हैं कि हमने 13,000 पेड़ बचाए हैं। पूजा स्थल, विश्राम घाट और आस्था से जुड़े किसी भी स्थान को हमने वहां से नहीं हटाया।

शर्मा बताते हैं कि सिटी में बने आईटी पार्क से होने वाले लाभ का एक हिस्सा कॉलोनी के मेंटेनेंस पर खर्च होता है। शुरूआत में सभी फ्लैट मालिकों से एक निश्चित रकम ली गई थी। अब हर माह मेंटेनेंस शुल्क नहीं लेना पड़ता। भोपाल की स्मार्ट सिटी में भी इस मॉडल को अपनाया जा सकता है।

सिडको के प्रोजेक्ट में 40-60 मॉडल : पई
नवी मुंबई विकसित करने वाली संस्था सिटी एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट काॅर्पोरेशन ऑफ महाराष्ट्र लिमिटेड की सीनियर टाउन प्लानर अमृता पई ने कहा कि हम नए प्रोजेक्ट में 60-40 मॉडल अपना रहे हंै। यानी किसानों से 40 फीसदी जमीन लेकर हम सड़क आदि विकसित कर रहे हैं और शेष 60 फीसदी जमीन को बेचने आदि के लिए किसान स्वतंत्र हैं।

माणिक शर्मा

शर्मा बताते हैं कि मगरपट्टा विकसित करने के लिए किसान सतीश मगर ने 120 परिवारों को इकट्ठा किया। उनसे पूछ कर ही प्लानिंग की गई। मगरपट्टा सिटी की आय में इनका भी हिस्सा है। इन परिवारों की दूसरी पीढ़ी को कंस्ट्रक्शन व्यवसाय से जोड़ा। इनमें से कुछ अब खुद का व्यवसाय कर रहे हैं। भोपाल में भी प्लानिंग में रहवासियों को शामिल करना चाहिए। उनके साथ चर्चा में ही समस्याओं का हल भी निकल कर आएगा।

मकान उम्र पूरी कर चुके हों तो ही तोड़िए
शर्मा कहते हैं कि भोपाल में जिस जगह पर स्मार्ट सिटी बनना है, यदि वहां स्कूल, अस्पताल, पार्क, सड़क आदि सुविधाएं उपलब्ध हैं तो उन्हें तोड़ कर नया बनाने की जरूरत नहीं है। इन सुविधाओं में सुधार और विस्तार किया जा सकता है।भीतरी सड़कों को चौड़ा किया जा सकता है। मौजूदा मकान यदि उम्र पूरी कर चुके हैं तो ही उन्हें तोड़ा जाए।











लेकिन नए मकान बनाने के लिए उसी साइट पर ऐसी जगह तलाशी जा सकती है जिससे पेड़ नहीं काटना पड़े। लेकिन इस सब का प्लानिंग के समय ही ध्यान रखना पड़ेगा।

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