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प्राकृतिक रॉक आर्ट म्यूजियम : पेनगवां

5 वर्ष पहले
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भोपाल के आसपास प्राकृतिक दर्शनीय स्थल अनगिनत हैं। यहां ऐसी-ऐसी अनछुई ऐतिहासिक धरोहरें भी हैं, जिनका संरक्षण अभी नहीं हुआ है। इन्हीं में शामिल है पेनगवां। भोपाल से करीब 40 किलोमीटर दूर रायसेन जिले में स्थित पेनगवां एक अनप्रोटेक्टेड रॉक आर्ट प्लेस है। मुझ जैसे रॉक आर्ट के प्रशंसकों के लिए यह ‘नेचुरल रॉक आर्ट म्यूजियम’ की तरह है। मेरा ऐसा कहने का कारण भी है। यह भूतल पर है और हमें यहां विविधताओं से परिपूर्ण रॉक आर्ट और रॉक पेंटिंग दिखाई देती है। पेनगवां में करीब 35 रॉक शेल्टर हैं, जिनमें हमें मध्यकालीन और ऐतिहासिक काल के चित्र दिखाई देते हैं। एक शैलाश्रय में चट्टानों पर चक्रव्यूह और रथ का चित्रण देखना रोमांचकारी है। वहीं एक और शैलाश्रय है, जिसमें गिद्ध का अलग-अलग चित्रांकन हैं। कुछ तो हर जगह पर नहीं पाए जाते। कई शैलाश्रयों में युद्ध के दृश्यांे, पशुओं की आकृतियों को उकेरा गया है। कुछ शैलाश्रय दो मंजिला हैं। यहां दीवारों की ऊंचाई तक के चित्र बनाए गए हैं। पेनगवां केवल इसलिए आकर्षित नहीं करता कि यहां रॉक आर्ट और रॉक पेंटिंग हैं, बल्कि फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए भी यह जगह जन्नत है। आकर्षक चट्टानें और मनोरम प्राकृतिक दृश्य फोटोग्राफरों को बेहद लुभाते हैं। शायद ही कोई होगा जो यहां आकर और इस खूबसूरती को देख कर कैमरा ऑन न करे।

अनिल गुलाटी, ट्रैवल ब्लॉगर हैं और सोशल मीडिया पर भोपाल धरोहर, पुरातत्व को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने ट्विटर हैंडल #bhopalwalk बनाया है।

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