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प्राइवेट स्कूलों की फीस पर कमेटियां करेंगी निगरानी

5 वर्ष पहले
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प्राइवेट स्कूलों में फीस पर निगरानी का काम क्षेत्रीय स्तर पर कमेटियों को सौंपा जा सकता है। इन कमेटियों में अध्यक्ष-सदस्य कौन होंगे? इस पर बुधवार को भोपाल में चर्चा होनी है। फिलहाल स्कूल शिक्षा विभाग ने फीस पर नियंत्रण के लिए मप्र निजी विद्यालय (फीस के संग्रहण का विनियमन) अधिनियम-2016 का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। उल्लेखनीय है कि आठ महीने पहले हाईकोर्ट के आदेश के पालन में स्कूल शिक्षा विभाग ने केवल गाइड लाइन तय कर दी थी। इसे कोर्ट ने मानने से इनकार कर दिया है।

हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने 13 मई 2015 को प्राइवेट स्कूलों में फीस को लेकर एक याचिका पर निर्णय दिया था। इसके बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने स्टेट लेवल पर एक्सपर्ट सदस्यों की कमेटी बना दी थी। शासन स्तर पर प्रदेश भर के एक्सपर्ट बुलाकर एक गाइड लाइन तैयार की थी। चूंकि इस बैठक में प्राइवेट स्कूलों के संचालक ज्यादा थे इसलिए कोर्ट ने इस गाइड लाइन को मानने से इनकार कर दिया था। इसके बाद एक्सपर्ट कमेटी की दूसरी बैठक 17 नवंबर को हुई। इसमें तय हुआ कि एक ड्राफ्ट तैयार कर अगली बैठक में रखा जाए। अब ड्राफ्ट तैयार हो चुका है और इस पर 10 फरवरी को अपर मुख्य सचिव स्कूल शिक्षा की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में चर्चा होगी।

हद में आएंगे सारे प्राइवेट स्कूल
मप्र निजी विद्यालय (फीस के संग्रहण का विनियमन) अधिनियम 2016 के अंतिम रूप लेने के बाद प्राइवेट स्कूल इसकी हद में आएंगे। क्षेत्रीय स्तर पर बनने वाली कमेटियां एडमिशन के वक्त ली जाने वाली फीस पर अधिक ध्यान देंगी।

कलेक्टर के पास शिकायतें पेंडिंग: प्राइवेट स्कूलों की फीस व अन्य तरह की शिकायतें सुनने के लिए कलेक्टर की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई थी। इस कमेटी ने कुछ आदेश भी किए। कोर्ट द्वारा गाइड लाइन को खारिज करने के बाद कलेक्टर की अध्यक्षता वाली कमेटी के अधिकार खत्म हो गए। अभी इस कमेटी के पास काफी शिकायतें पेंडिंग हैं।

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