डीजे पर जारी रहेगा प्रतिबंध, राज्य सरकार से मांगा जवाब
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने डीजे से फैलने वाले प्रदूषण के मामले में राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया है। सरकार से पूछा गया है कि उसने अब तक क्या किया? सरकार को फिलहाल चार सप्ताह का समय और मिल गया है। इस वजह से डीजे पर फिलहाल प्रतिबंध जारी रहेगा।
डीजे की आवाज से हो रहे ध्वनि प्रदूषण के मामले में जस्टिस दलीप सिंह ने आदेश दिया कि चार सप्ताह में वह उपाय बताए। डीजे संचालकों की तरफ से प्रशासनिक अधिकारी विकास मिश्रा ने बताया कि डीजे संचालकों ने कहा है कि वे बारात आदि निकलते समय सड़क पर लगने वाले जाम को रोकने के लिए वे ट्रैफिक वार्डन रखेंगे। बैंच ने कहा कि यह मामला भोपाल का ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश का है। राज्य सरकार इस मामले में क्या कार्रवाई कर रही है, चार सप्ताह में वह जवाब पेश करे।
प्रदूषण मामले पर एनजीटी में सुनवाई
संचालक बोले-नियम से चलेंगे तो डीजे कैसे बजेगा
डीजे विवाद को लेकर बुधवार प्रशासन और डीजे संचालकों बैठक का आयोजन लालघाटी स्थित एक मैरिज गार्डन में किया गया। संचालकों ने डीजे की अनुमति देने की दलील प्रशासन के अफसरों के सामने रखी। इसको प्रशासन के अफसरों ने खारिज करते हुए कहा कि चूंकि यह मामला एनजीटी में है। इसलिए अनुमति का सवाल ही पैदा नहीं होता है। प्रशासन के अफसरों ने डीजे को बजवाया तो पता चला कि उसकी आवाज के साथ-साथ जनरेटर की आवाज बहुत अधिक है। इसकी जांच के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक प्रवीण कोठारी को बुलाया गया। डीजे की आवाज की जांच को पता चला कि निर्धारित डेसीमल 55 की जगह 80 डेसीमल साउंड नोट किया गया। साउंड कंसल्टेंट तरुण मूलचंदानी ने कहा कि अगर नियमों का पालन करेंगे तो डीजे बजना ही मुश्किल होगा।