4 माह बाद भी नहीं पता किस रास्ते से आया था बाघ
नवीबाग में पकड़ा गया बाघ आखिर पहुंचा कैसे? आम लोगों के साथ वन विभाग के अफसरों के पास भी इस सवाल का जवाब नहीं है। कारण यह है कि उस बाघ को पन्ना भेजने के बाद काम खत्म समझ लिया गया। भोपाल फॉरेस्ट सर्किल के तत्कालीन सीसीएफ महेंद्र यादवेंदु ने जांच रिपोर्ट मांगी थी। लेकिन फाॅरेस्ट डिवीजन ने चार महीने में न तो जांच की और न ही कोई रिपोर्ट सौंपी।
निशातपुरा के नवीबाग स्थित कृषि अभियांत्रिकी संस्थान परिसर में 29 अक्टूबर 2015 को एक बाघ देखा गया था। करीब पांच घंटे की मशक्कत के बाद बाघ को बेहोश कर पकड़ा गया और फिर पन्ना नेशनल पार्क भेज दिया गया था। इसके बाद वन विभाग के अफसरों ने यह जानने की कोशिश तक नहीं की आखिर बाघ किन रास्तों से होते हुए शहर तक पहुंचा। हैरानी की बात तो यह है कि अभी तक कोई आदेश जारी नहीं किए गए।
बाघों की निगरानी के लिए मांगा बजट
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की फटकार के बाद रातापानी सेंचुरी प्रबंधन ने अब सात स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए बजट मांगा है। सेंचुरी के अधीक्षक सदगुरु चक्रधर ने बताया कि सेंचुरी में प्रवेश गेट पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए 10 लाख 50 हजार का प्रस्ताव भोपाल फारेस्ट सर्किल को भेजा है।
सतर्क रहने के आदेश
अभी यह जांच की जा रही है कि क्षेत्र में दूसरा बाघ है या नहीं। सभी को सतर्क रहने के आदेश दिए गए हैं। आगे की कार्रवाई चल रही है। रवि खुड़े, एसडीओ, भोपाल फॉरेस्ट डिवीजन
न जांच, न रिपोर्ट
जिनके कंपार्टमेंट से आया उन पर हो कार्रवाई
गीदगढ़ में है बाघ का मूवमेंट
अभी समरधा और गीदगढ़ में इन दिनों एक बाघ का मूवमेंट बना हुआ है। इस बारे में मैदानी अमले का कहना है कि इसकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी है।