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वीडियोकॉन ग्रुप की चार फर्मों ने छुपाई 90 करोड़ रुपए की बिक्री

5 वर्ष पहले
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कमर्शियल टैक्स विभाग के एंटी इवेजन ब्यूरो ने वीडियोकॉन की चार ट्रेडिंग फर्मों कार्रवाई की। इसमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आई हैं। कंपनी ने 90 करोड़ रुपए की बिक्री छुपाई है। राजधानी में वीडियोकॉन की चार सहयोगी ट्रेडिंग फर्म केआईएल लिमिटेड, वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज, स्काय एप्लायंसेस और ट्रेंड इलेक्ट्रॉनिक्स हैं।

इन फर्मों ने पिछली तीन तिमाहियों के दौरान कुल 220 करोड़ रुपए की बिक्री के रिटर्न पेश किए और कुल 310 करोड़ रुपए की खरीद दर्शाई है। इस गड़बड़ी का खुलासा फाॅर्म-49 की पड़ताल में हुआ। ब्यूरो प्रमुख ओपी पांडे ने बताया कि कंपनी की चार फर्मों ने 79 करोड़ रुपए के फाॅर्म डाउनलोड किए थे। लेकिन केवल 37 करोड़ रुपए के फाॅर्म का उपयोग किया। पड़ताल का पहला बिंदु यही था कि आखिर बाकी 42 करोड़ के फाॅर्म-49 गए कहां।

सभी फर्मों के स्टॉक वेरिफिकेशन और बिक्री के दस्तावेजों के मिलान के दौरान मिसमैच काफी अधिक निकला। पांडे ने बताया कि वीडियोकॉन समूह के स्थानीय अधिकारियों ने 6.59 करोड़ रुपए का टैक्स जमा करा दिया है।

क्या है फार्म-49

दूसरे राज्यों से मध्यप्रदेश में सामान मंगवाने के लिए हर कारोबारी को फाॅर्म-49 डाउनलोड करना पड़ता है। राज्य की चौकियों से माल की एंट्री इन्हीं फाॅर्म को देखकर होती है। इसे ट्रांजिट पास भी कहते हैं।

कंपनी और डीलर की बिक्री-खरीद में 90 करोड़ के अंतर की बात गलत है। हमने तो केवल घोषित टैक्स भरा है। यह हमें 31 जनवरी तक जमा कराना था। लेकिन हम लेट हो गए। उसकी पेनॉल्टी भी हमने दे दी है। -सौरभ अग्रवाल, टैक्स कोआर्डिनेटर, वीडियोकॉन ग्रुप, मप्र

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