पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • जिम्मेदारी सिर्फ कंपनी या पीसीबी की नहीं, राज्य सरकार भी गंभीरता दिखाए

जिम्मेदारी सिर्फ कंपनी या पीसीबी की नहीं, राज्य सरकार भी गंभीरता दिखाए

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
लहारपुरा, ईंटखेड़ी, इस्लाम नगर व भानपुरा में भी हो रही सीवेज फार्मिंग
एन्वायर्नमेंट रिपोर्टर | भोपाल

अस्पतालों व अन्य हेल्थ केयर फेसिलिटी सेंटर्स से निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट के निष्पादन के लिए राज्य सरकार अब तक कोई रणनीति नहीं बना पाई है। गुरुवार को हुई सुनवाई में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने जब पूछा कि बायोमेडिकल वेस्ट के निष्पादन के लिए राज्य सरकार की क्या रणनीति है तो बताया गया कि अब तक इस मामले में राज्य सरकार की ओर से कोई ठोस पहल ही नहीं की गई है। इस खुलासे के बाद एनजीटी ने इस मामले में राज्य सरकार की भी जिम्मेदारी तय कर दी है। बेंच ने कहा कि बायोमेडिकल वेस्ट के निष्पादन की जिम्मेदारी केवल कचरा नष्ट करने वाली कंपनी मप्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल की ही नहीं है। राज्य सरकार भी इस कचरे के निष्पादन के लिए रणनीति बनाए। इसके लिए एनजीटी ने राज्य सरकार को एक महीने का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी।

गोविंदपुरा स्थित भोपाल इंसीनरेटर लिमिटेड को शिफ्ट करने के लिए रहवासी बलवंत सिंह रघुवंशी द्वारा दायर याचिका पर गुरुवार को एनजीटी में सुनवाई हुई। भोपाल इंसीनरेटर लिमिटेड के वकील शिवेंदू जोशी ने एनजीटी द्वारा रिटायर्ड जिला न्यायाधीश जस्टिस रेणु शर्मा की अध्यक्षता में गठित कमेटी की रिपोर्ट पेश की। इसमें बताया है कि निरीक्षण में भोपाल इंसीनरेटर लिमिटेड में बायोमेडिकल वेस्ट के निष्पादन का काम बेहतर तरीके से किया जा रहा है। 2003 से 2014 तक कंपनी भोपाल व रायसेन से निकले 19.32 लाख किग्रा बायोमेडिकल वेस्ट का निष्पादन किया जा चुका है। यह निरीक्षण 29 व 30 दिसंबर 2015 को किया गया था।









गुरुवार को ही सुनवाई में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय भारत सरकार, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल और राज्य सरकार को अपना जवाब प्रस्तुत करना था लेकिन किसी ने भी नहीं किया। इस दौरान एनजीटी ने यह भी स्पष्ट करने को कहा कि भोपाल इंसीनरेटर लिमिटेड को पीसीबी से एन्वायरमेंटल क्लीयरेंस लेने की जरूरत है या नहीं।

शाहपुरा के किसानों ने उठाया था मामला
पिछली सुनवाई में शाहपुरा के किसानों ने सवाल उठाया था कि सरकार केवल शाहपुरा पर ही ध्यान केंद्रित कर रही है, जबकि बाकी स्थानों पर हो रही सीवेज फार्मिंग को नजरअंदाज किया जा रहा है। वहीं, याचिकाकर्ता डॉ. पांडे ने एनजीटी से राज्य शासन को मप्र के सीवेज फार्मिंग के समस्त स्थानों चिह्नांकित कर उनके खिलाफ की गई कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने की मांग की थी।

जांच कमेटी ने दिए यह भी सुझाव
इंसीनरेटर में बायोमेडिकल वेस्ट को हैण्डल करने वाले स्टाफ की समय-समय पर ट्रेनिंग हो।

नए वाहनों की व्यवस्था की जाए।

वाहनों और कन्टेनर्स की सफाई सही तरह से की जाए।

स्टोरेज रूम से निकलने वाली गंध पर विशेष ध्यान दिया जाए।

यह है रिपोर्ट में
इंसीनरेटर के क्षेत्राधिकार में भोपाल व रायसेन जिले आते हैं।

इंसीनरेटर में 297 हैल्थ केयर फेसिलिटी, 5 ब्लड बैंक, 106 पैथोलॉजी सहित 175 अन्य सेंटर्स का बायोमेडिकल वेस्ट निष्पादन के लिए आता है।

क्षमता 1200 किलो ग्राम प्रति दिन की है। राेज 950 किलो वेस्ट का इंसीनरेशन और 200 किलो वेस्ट की ऑटोक्लेविंग होती है।

सफाई के लिए 15.6 क्यूबिक मीटर पानी रोजाना उपयोग में लाया जाता है।

इसकी वैधता 31 दिसंबर 2015 को समाप्त हो चुकी है।

खबरें और भी हैं...