हिंदू जागरण मंच के
भोजशाला के...
हिंदू जागरण मंच के संयोजक गोपाल शर्मा ने बताया कि 1952 में भोज उत्सव समिति का गठन हुआ था और तब से ही वसंत पंचमी की पूजा भोजशाला के गर्भगृह में होती आई है। हिन्दू संगठन भोजशाला के गर्भगृह में अखंड पूजा करना चाहते हैं। इसके लिए दोपहर में ही हवन कुंड को लीपने के बाद अक्षत-कुमकुम चढ़ाकर शुद्ध भी कर लिया गया था। शाम को भोजशाला सजाई जाना थी। वंदनवार, मालाएं और ध्वजाओं के साथ अन्य सामग्री भी भीतर भेजी गई लेकिन सूर्यास्त से ठीक पहले भोज उत्सव समिति ने सारी सामग्री वापस बुला ली। भोपाल (सर
हिंदू जागरण मंच के संयोजक गोपाल शर्मा ने बताया कि 1952 में भोज उत्सव समिति का गठन हुआ था और तब से ही वसंत पंचमी की पूजा भोजशाला के गर्भगृह में होती आई है। हिन्दू संगठन भोजशाला के गर्भगृह में अखंड पूजा करना चाहते हैं। इसके लिए दोपहर में ही हवन कुंड को लीपने के बाद अक्षत-कुमकुम चढ़ाकर शुद्ध भी कर लिया गया था। शाम को भोजशाला सजाई जाना थी। वंदनवार, मालाएं और ध्वजाओं के साथ अन्य सामग्री भी भीतर भेजी गई लेकिन सूर्यास्त से ठीक पहले भोज उत्सव समिति ने सारी सामग्री वापस बुला ली। भोपाल (सरकार) से अखंड पूजा को लेकर स्थिति स्पष्ट न होने के कारण समिति ने भीतर की तैयारी रोक दी। समिति ने साफ कहा है कि पूजा को इस बार खंडित नहीं होने देंगे। दूसरी तरफ मुस्लिम लोग जुमे की नमाज पर अड़े हैं। टकराव को देखते हुए प्रशासन ने भोजशाला और कमाल मौलाना दरगाह को 16 से 30 फ़ीट ऊंची टीन की चद्दरों की बेरिकेटिंग से कवर कर दिया है ताकि पूजापाठी और नमाजी एक-दूसरे को देखे बिना अपनी-अपनी भक्ति कर सकें।
प्रशासन की तैयारी 2006 के फार्मूले वाली, यानी पूजा-नमाज दोनों : प्रशासन की तैयारी इस बार 2006 के फार्मूले के तहत पूजा और नमाज साथ-साथ करवाने की है। सूत्रों के मुताबिक भोजशाला की एक छत पर टेंट भी लगा दिया गया है। संभवतः यहीं नमाज होगी। नमाज के दौरान सरस्वती पूजन के मंत्रोच्चार की आवाज नमाजियों तक न पहुंचे इसलिए लाउडस्पीकर की आवाज बंद कर दी जाएगी। हाईकोर्ट ने भोजशाला में कानून व्यवस्था बनाए रखने को लेकर लगी याचिका पर जो निर्देश पहले दिए थे, वह यथावत रहेंगे। यानी पूजा और नमाज पुरातत्व विभाग के कार्यक्रम अनुसार होगी।
बेटे के उठावने में...
वह एक शुरुआत थी। तब से अब तक महाराष्ट्र के 20 शहरों में वे इस विषय को लेकर गए हैं। इसके लिए उन्होंने पूरी तैयारी की है। रोड सेफ्टी पर 2010 से ही उन्हाेंने काम शुरू किया। कई कार्यक्रम किए। ‘पहला कदम’ नामक शॉर्ट फिल्म बनाई। फिल्म की थीम रोड सेफ्टी से जुड़ी थी, जिसे कई अवार्ड मिले। यह एक पिता का दर्द था, जिसने सड़क हादसे में अपने जवान बेटे को खोया था। इस मुहिम में बाद में उन्होंने ग्लूम एंड ग्लोरी के नाम से एक नाटक तैयार किया। इसकी प्रस्तावना शाहरुख खान ने लिखी है। करीब 45 मिनट के इस प्ले के आखिरी 10 मिनट जिंदगी की अहमियत बताते हुए रोड सेफ्टी और हेलमेट लगाने पर केंद्रित हैं। देश में 70 जगह यह नाटक खेला गया। यह मुहिम नेगी की पहचान बन गई।
महाराष्ट्र के बाद मध्यप्रदेश की बारी : जल्दी ही उनका अगला पड़ाव भोपाल होगा। एएसपी ट्रैफिक समीर यादव कहते हैं- ट्रैफिक सुरक्षा पर उनसे बेहतर कौन बता सकता है। भास्कर से चर्चा में नेगी कहते हैं कि इंदौर से मेरा पुराना नाता रहा है। इसलिए मध्यप्रदेश में इस अभियान से जुड़ना मेरा फर्ज है। शहर के पेट्रोल पंपों और कॉलेजों में हेलमेट अनिवार्य किया गया है। पेट्रोल पंपों पर ऐसा पहले भी किया गया मगर कॉलेज पहली बार आगे आए। उस हादसे के करीब पांच महीने बाद नेगी ने यशराज फिल्म्स की सुपर हिट मूवी चक दे इंडिया के लिए काम शुरू किया। जिंदगी तो अपने रास्ते पर आ गई मगर अभिरंजन एक अफसोस बनकर उनके जेहन में छाया रहा। यह मिशन उस घुटन से मुक्त होने की एक कोशिश है। वे कहते हैं- मैं भोपाल आकर कहना चाहूंगा कि स्कूल-कॉलेज में पढ़ने वाले हरेक नौजवान को हर पल अपने माता-पिता का चेहरा याद रखना चाहिए।
इशरत जहां लश्कर की...
हेडली के खुलासे से इस विवादित मुठभेड़ पर विवाद फिर सुलगने के आसार हैं। अमेरिका से वीडियो लिंक के जरिए हेडली ने मुंबई की विशेष कोर्ट में तीसरे दिन बयान दर्ज कराए। बुधवार को तकनीकी खामी की वजह से बयान नहीं हो पाया था। हेडली ने कोर्ट को बताया कि लश्कर कमांडर जकी-उर-रहमान लखवी ने उससे लश्कर के एक अन्य आतंकी मुजम्मिल बट्ट के भारत में ‘असफल अभियान’ का जिक्र किया था। इसमें आतंकवादी संगठन की एक महिला सदस्य मारी गई थी। विशेष सरकारी वकील उज्जवल निकम के कुरेदने पर हेडली ने कहा, ‘(मुझे बताया गया था कि) पुलिस के साथ मुठभेड़ हुई थी जिसमें एक महिला आत्मघाती हमलावर मारी गई थी।’
वैज्ञानिकों ने...
महीनों के परीक्षण के बाद इसकी पुष्टि हुई। कुछ वैज्ञानिक इस खोज को 2012 की “हिग्स बोसॉन’ यानी गॉड पार्टिकल की खोज के बराबर बता रहे हैं। कुछ उससे बढ़कर। इस प्रोजेक्ट को अमेरिकी नेशनल साइंस फाउंडेशन के डायरेक्टर फ्रांस कोर्डोवा ने वित्तीय मदद दी है। उन्होंने कहा, “गैलीलियो ने टेलीस्कोप को आसमान की ओर उठाकर एस्ट्रोफिजिक्स की शुरुआत की थी। हमारी खोज ब्रह्मांड के कई रहस्यों को सामने लाएगी। अनपेक्षित खोज की ओर लेकर जाएगी।’
पेज 1 के शेष