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तुअर का उत्पादन होगा 15 लाख टन सरकार खरीदेगी सिर्फ 74 हजार टन

5 वर्ष पहले
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टमाटर के बाद अब तुअर दाल का बंपर उत्पादन मध्यप्रदेश के किसानों के लिए मुसीबत का सबब बन रहा है। मंडियों में इसके दाम 3200-3500 रुपए प्रति क्विंटल ही चल रहे हैं। इस दाम पर किसानों को अपनी लागत और मजदूरी के लाले पड़ रहे हैं। अधिकतर लोगों ने सरकार ने 5050 रुपए का समर्थन मूल्य जरूर घोषित हाेने के बाद यह कदम उठाया। इसके चलते प्रदेश में तुअर दाल का उत्पादन 15 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है। लेकिन सरकार ने साफ कर दिया है कि वह केवल अच्छी किस्म की 74 हजार टन ही समर्थन मूल्य पर खरीदेगी। यह खरीद फरवरी के अंत से शुरू होगी, जो मई तक जारी रहेगी। जमीनी हकीकत यह कि मंडियों में पिछले एक माह से लगातार तुअर दाल की आवक हो रही है। तुअर की फसल की आवक शुरू होने के एक माह बाद भी प्रदेश के अधिकांश खरीद केंद्र शुरू नहीं हो पाए।

4.62 लाख टन था तुअर दाल का उत्पादन वर्ष 2014 में

10.50 लाख टन तुअर दाल का उत्पादन है इस बार सरकार का। जानकार कहते हैं यह उत्पादन 15 लाख टन तक पहुंच सकता है।

03 लाख मीट्रिक टन तुअर दाल की खपत है मप्र में। रोजाना 8 हजार क्विंटल। अभी जो दाल आ रही है उसमें 50 फीसदी ही लोकल दाल है। यानी अभी भी आधी दाल महाराष्ट्र से प्रदेश में आ रही है।

40 लाख मीट्रिक टन है मप्र की मिलों की प्रोसेसिंग क्षमता। यहां की दाल पूरे देश में जाती है। यह बेहद संगठित उद्योग है। मिलर्स दाल एक्सपो के जरिए पूरे देश में अपनी गुणवत्ता का प्रदर्शन करते हैं।

दो माह बाद बढ़ेंगे दाम
विशेषज्ञ कहते हैं कि देश में इस समय मोजाम्बिक, तंजानिया, मलावी और म्यांमार से दालों का आयात बंद हो जाएगा। ऐसे में मई के बाद दालों के दाम अचानक बढ़ना शुरू हो जाएंगे।

प्रदेश की दाल की गुणवत्ता देश में सबसे बेहतर
मिलें चाहती हैं कि सरकार किसानों की सारी तुअर खरीदे। बाद में वह मिलों को जारी करे। प्रदेश की मिलें दाल न होने के कारण पूरे साल उत्पादन नहीं कर पाती। उनकी क्षमता करीब 40 लाख टन है। 25 फीसदी खपत मप्र में होती है।’ सुरेश अग्रवाल, अध्यक्ष, मप्र दाल उद्योग संघ मप्र

सरकारी खरीद केंद्र तो अब खरीदारी करने जा रहे हैं। इसके लिए सभी को निर्देश जारी हो चुके हैं। इससे पहले जो तुअर दाल बाजार में आई है। उसकी गुणवत्ता ठीक नहीं है। उसमें नमी ज्यादा है। सरकार केवल अच्छी गुणवत्ता एफ एंड क्यू वाली तुअर दाल ही समर्थन मूल्य पर खरीदेगी।’ डाॅ. राजेश राजौरा, पीएस, कृषि विभाग, मप्र सरकार

तुअर दाल की फसल 8 माही होती है। इसके मायने यह हैं कि अगर किसान ने तुअर लगाई है तो वह खरीफ के साथ रबी में भी कोई फसल नहीं ले पाएगा। उसे केवल 3200 रुपए क्विंटल के दाम मिल रहे हैं। इस दाम पर लागत के बाद उसकी मजदूरी भी नहीं निकल पा रही है। राजेंद्र कोठारी, अर्थशास्त्री

एक साल में तीन गुना उत्पादन
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