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मालिश करते वक्त गर्दन चटकाई, दोस्त की मौत

5 वर्ष पहले
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कहते हैं नीम-हकीम खतरा-ए-जान... एक ऐसा ही वाकया हुआ है नजीराबाद कस्बे में। गर्दन में दर्द की शिकायत पर एक युवक ने दोस्त की मालिश शुरू की। उसे नस के मर्ज का कोई तजुर्बा नहीं था फिर गर्दन चटकाई। दर्द बढ़ा, परिवार ने युवक को अस्पताल पहुंचाया, जहां उसकी मौत हो गई। एक साल तक चली लंबी जांच के बाद नजीराबाद पुलिस ने मदद कर रहे दोस्त के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है।

घटना आठ दिसंबर 2015 की है। 35 वर्षीय हरनाथ सिंह किसान थे। अचानक उनके शरीर और गर्दन में दर्द होने लगा। घर के सामने से गुजर रहे मधु ठाकुर को मां ने आवाज देकर बुलाया। मधु अक्सर लोगों की मालिश कर दिया करते थे। मधु ने शरीर की मालिश के बाद हरनाथ की गर्दन चटकाई। तेज झटके से गर्दन की हड्डी टूट गई। परिवार ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया, जहां कुछ देर इलाज के बाद हरनाथ ने दम तोड़ दिया। अस्पताल की सूचना पर नजीराबाद पुलिस ने पोस्टमार्टम करवाया। एसडीओपी बीना सिंह के मुताबिक हाल ही में मिली पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह गर्दन की हड्डी टूटना बताया गया है। हरनाथ का विसरा भी लिया गया था, लेकिन इसमें कुछ ऐसा नहीं मिला, जो मौत की वजह बने।

पुलिस ने हरनाथ की मां के भी विस्तृत बयान दर्ज किए। उसने कहा कि मधु मालिश करते हुए हरनाथ के सीने पर बैठ गया। अचानक तेज झटका दिया, जिससे गर्दन टूट गई। एसडीओपी के मुताबिक पीएम रिपोर्ट, विसरा और हरनाथ की मां के बयान को आधार बनाकर मधु के खिलाफ गैर इरादतन हत्या (304आईपीसी) का केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। इसमें दस वर्ष तक के कारावास की सजा का प्रावधान है। चूंकि हरनाथ अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखता था और मधु सवर्ण है। इसलिए इस मामले में कानूनी सलाह ली जा रही है। यदि अनुमति मिली तो मधु के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जाएगी।

डॉक्टर की राय ही उचित
शरीर की नस-नाड़ी को जानने के लिए बाकायदा प्रशिक्षण लिया जाता है। पूरे शरीर विज्ञान को जानने और समझने के लिए मुझे दस साल से अधिक का समय लगा। जो नस-नाड़ी विशेषज्ञ होते हैं वह केवल नसों को ठीक करते है। अक्सर गर्दन की नस चढ़ जाती है। कोई भी नस-नाड़ी विशेषज्ञ गर्दन नहीं चटकाता बल्कि नसों को ठीक करता है। नसों के चढ़ने की समस्या के हल के लिए व्यक्ति को डाॅक्टर को दिखाना चाहिए या फिर प्रशिक्षण प्राप्त वैद्य से।\\\' - अरविंद झारिया, पारंपरिक विधा के नस-नाड़ी विशेषज्ञ

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