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झूठ बोलकर पत्नी नशामुक्ति केंद्र ले गई: राजीव तिवारी / झूठ बोलकर पत्नी नशामुक्ति केंद्र ले गई: राजीव तिवारी

News - खुद नशे के दलदल से निकले, दूसरों के लिए बढ़ाया हाथ दोस्त के ताऊजी और साधु की सलाह काम आई: राजेश चौरसिया ...

Feb 19, 2016, 03:21 AM IST
खुद नशे के दलदल से निकले, दूसरों के लिए बढ़ाया हाथ

दोस्त के ताऊजी और साधु की सलाह काम आई: राजेश चौरसिया

टर्निंग पाइंट- जून 1996 में साधु ने कहा कि नशे में क्यों जिंदगी खराब कर रहे हो। ध्यान क्यों नहीं करते ।

टर्निंग पाइंट- अप्रैल 2013 में बच्ची की तबीयत के नाम पर नशे के लिए लोगों से उधार रुपए लिए तो प|ी नाराज हो गई और कहा- बच्चों के नाम पर क्यों झूठ बोलते हो।

मैं 1991 में एसएटीआई विदिशा से मैनिट आ गया। यहां हॉस्टल नंबर छह में रहते हुए शराब की लत लग गई। 1993 में इंजीनियरिंग पूरी कर ली, लेकिन नशे की आदत बरकरार रही। तीन-चार साल के अंदर ही तमाम बीमारियों ने घेर लिया और वजन हो गया 75 किलो से भी ज्यादा। इस बीच एक दोस्त के ताऊजी को 75 साल की उम्र में चुस्त-दुरुस्त देखा तो उनसे बात की। ताऊजी ने मुझे मेडिटेशन के बारे में बताया। बस, यहीं से मेरी जिंदगी बदलना शुरू हो गई। करीब आठ साल पहले नशा छोड़ दिया और सात्विक जीवन जीने लगा। अब एकदम चुस्त-दुरुस्त हूं। हर रविवार को सुबह कलियासोत डेम पर एक ध्यान शिविर में एेसे लोगों को ट्रेनिंग देता हूं जो अलग-अलग तरीके से नशे की गिरफ्त में हैं। उन्हें इससे होने वाले नुकसान के बारे में भी बताता हूं। मैनें यह सीखा है कि ध्यान के माध्यम से व्यक्ति अपने शरीर को आदेश दे सकता है कि मैं नशा नहीं करूंगा। बस यही मैं सबको सिखाता हूं।

दिल्ली में चार्टर्ड अकाउंटेंट की पढ़ाई कर रहा था। 2005 में पिताजी की मृत्यु के कारण भोपाल आना पड़ा। सरकारी नौकरी लग गई, शादी कर ली। लेकिन गलत सोहबत में ब्राउन शुगर की लत लग गई। जवाहर चौक का सरकारी मकान छोड़कर नेहरू नगर के निजी मकान में आ गए। नशे के खर्च में निजी मकान बिक गया। घर में चोरी करने लगा। लोगों से झूठ बोल कर पैसे उधार लेने लगा। पीएंडटी कॉलोनी के एक खंडहरनुमा मकान और एक पाइप के अंदर दिनभर बैठे रहना और ब्राउन शुगर लेना, यही मेरी जिंदगी थी। छोटे भाई ने भी साथ छोड़ दिया। इस बीच प|ी ने बेंगलुरू के एक नशामुक्ति केंद्र के बारे में सुना। झूठ बोलकर प|ी मुझे वहां ले गई। वहां मुझे रोजाना संकल्प दिलाया जाता था- मैं आज नशा नहीं करूंगा। ऐसा लगातार चार महीने तक चला। आखिरकार मेरी लत छूट गई। आज चार साल हो गए मैंने कोई नशा नहीं किया। फिर से मकान भी बन गया है। हाल ही में बीस लोगों को नशा छोड़ने के लिए प्रेरित कर रहा हूं।

संकल्प से सब संभव

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