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महिला अायोग की सिफारिशों पर अमल नहीं, सभी कलेक्टर्स को भेजा रिमाइंडर

5 वर्ष पहले
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स्कूल वैन संचालकों पर हाईकोर्ट, महिला आयोग के आदेशों तक का कोई असर नहीं हो रहा है। स्कूल वैन, टाटा मैजिक और ऑटो रिक्शा क्षमता से ज्यादा बच्चों को ढो रहे हैं। इस मामले में महिला आयोग द्वारा की गई सिफारिशों का पालन न होने पर अध्यक्ष लता वानखेड़े ने प्रदेश के सभी कलेक्टर्स को रिमाइंडर भेजा है।

हाईकोर्ट ग्वालियर पीठ के तत्कालीन जस्टिस एसके गंगेले व जस्टिस जीडी सक्सेना की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा था कि जिस स्कूली वाहन में निर्धारित संख्या से अधिक बच्चे बैठें तो उस वाहन का रजिस्ट्रेशन और ड्राइवर का लाइसेंस रद्द कर दिया जाए। वहीं महिला आयोग ने भी राज्य शासन से बच्चों की सुरक्षा को लेकर 6 बिंदुओं पर सिफारिश की थी। आयोग की अध्यक्ष वानखेड़े ने बताया कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर की गई पूर्व सिफारिशों का पालन प्रतिवेदन न मिलने की वजह से रिमाइंडर जारी किया है।

ये कीं सिफारिशें
पहले भी हुए प्रयास, कुछ दिन में कार्रवाई बंद
राजधानी में 27 अगस्त 2012 को तत्कालीन अपर मुख्य सचिव परिवहन एंटोनी डिसा ने सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन का पालन नहीं करने वाले वाहनों पर कार्रवाई के आदेश दिए थे। 23 मार्च 2013 को संभागीय कमिश्नर प्रवीण गर्ग ने भी इस तरह के आदेश दिए थे। कुछ दिन चेकिंग चली, फिर बंद हो गई। महिला आयोग ने मार्च 2014 को नीतिगत बैठक में सिफारिश की थी ।

नोटिस जारी किए लेकिन स्कूली बसों पर कार्रवाई नहीं
राजधानी में वर्तमान में 1750 स्कूल बसें है। सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन का पालन न करने वाली 550 बसों को नोटिस जारी किए गए हैं लेकिन कार्रवाई एक भी बस पर नहीं की गई। वहीं 4830 वैन संचालित हो रही हैं। इसमें से अधिकांश गैस किट से चल रही है। इन वाहनों के पास स्कूल के बच्चे लाने ले जाने का न परमिट है और न ही स्कूलों से अनुबंध। यही हाल ऑटो रिक्शा और टाटा मैजिक के हैं।

शहर के भीतर चैकिंग करना ट्रैफिक पुलिस का काम
स्कूल बस और वैन पर समय समय पर कार्रवाई की जाती है। शहर के अंदर वाहनों की चैकिंग का काम ट्रैफिक पुलिस का है। ट्रैफिक पुलिस की सिफारिश के बाद स्कूली वाहनों के परमिट निरस्त किए जाते हैं। सुनील राय सक्सेना, आरटीओ, भोपाल

वाहनों में बच्चों को अधिक संख्या में न बैठाया जाए। स्कूल प्रबंधन वाहनों की पूरी जानकारी, चालक व हेल्पर का नाम, पता, मोबाइल नंबर व लाइसेंस की छायाप्रति रखें।

बच्चों को स्कूल लाते-ले जाते वक्त गोद में न बिठाया जाए।

स्कूली वाहन में किसी भी प्रकार का म्यूजिक सिस्टम न लगाएं।

ड्राइवर गाड़ी चलाते हुए मोबाइल का प्रयोग न करें।

परिवहन विभाग सुनिश्चित करे कि सभी स्कूली वाहन सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन का पालन कर रहे हैं।

स्कूली वाहन का पर औचक निरीक्षण किया जाए।

गैस किट वाले वाहनों को स्कूल प्रबंधन प्रतिबंधित करे, साथ ही सतत निगरानी रखे।

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