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एक ओर राज्य प्रशास

4 वर्ष पहले
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एक साहब और एक मैडम इन दिनों जिले से अपनी रवानगी का इंतजार कर रहे हैं। इनकी मौजूदा पोस्टिंग को सिर्फ डेढ़ साल ही हुआ है, लेकिन अब दोनों ही भोपाल में नहीं रहना चाहते। दोनों ने ही वल्लभ भवन में बैठने वाले आला अफसरों से किसी अन्य जिले में या किसी और विभाग में पोस्टिंग की गुहार लगाई है। साहब उत्तर की कुर्सी का रुतबा छिनने के बाद से ही खफा बताए जाते हैं। वहीं मैडम बिना रुतबे के अतिरिक्त अधिकारी के तौर पर पदस्थापना से नाखुश हैं। राजधानी होने के कारण प्रोटोकॉल के झमेले में होने वाली समय की बर्बादी भी इन
एक ओर राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसर भोपाल जिले में लंबी पोस्टिंग नहीं चाहते, वहीं राजस्व सेवा के अफसर यहां से कहीं और जाना ही नहीं चाहते हैं। इनमें से ज्यादातर ने भोपाल में पदस्थापना के लिए खूब जोड़तोड़ की, लेकिन सफलता बहुत कम लोगों को मिली क्योंकि यहां कोई पोस्ट खाली ही नहीं थी, लेकिन अपने राजनीतिक रिश्तों के जरिए कुछ ने अतिरिक्त तहसीलदार के रूप में पोस्टिंग करा ली। खास बात यह है कि एक ओर प्रदेशभर के तहसीलदार-नायब तहसीलदारों के तबादले हुए, पर भोपाल में पहले से मौजूद किसी राजस्व अधिकारी का तबादला नहीं हुआ, बल्कि बाहर से कुछ अतिरिक्त अफसर जरूर भोपाल आ गए।


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