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गर्मी के प्रवासी पक्षी अभी लौटे नहीं और हिमालयन बर्ड आने लगे

4 वर्ष पहले
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मौसम में हो रहे बदलाव का असर अब प्रवासी पक्षियों पर भी दिखने लगा है। भोपाल और उसके आसपास के इलाकों से अभी समर विजिटर बर्ड्स बने हुए हैं। वहीं विंटर विजिटर बर्ड्स भी दिखाई पड़ने लगे हैं। एक साथ दोनों मौसम के प्रवासी पक्षियों को देखकर पक्षी विशेषज्ञ हैरान है। उनका कहना है कि इस तरह का दृश्य पहली बार देखने मिल रहा है। वह भी एक दो नहीं बल्कि दर्जनों की संख्या में बने हुए हैं।

गर्मियों में अरब देशों, दक्षिण में श्रीलंका से मध्यभारत आने वाले प्रवासी पक्षी लौटने का नाम नहीं ले रहे हैं। इनकी उपस्थिति वनविहार, हलाली डेम, कोलार डेम, कैरवा डेम, कलियासोत डेम,शाहपुरा झील सहित जिले के आसपास इलाकों में बनी हुई है। बर्ड वॉचर इसकी सबसे बड़ी वजह मौसम को मान रहे हैं। पर्यावरण विशेषज्ञ सुदेश बाघमारे का कहना है कि अक्टूबर में तापमान कम होने लगता है, लेकिन इस बार अभी भी दिन का तापमान 34 डिग्री के आसपास बना हुआ है। यही वजह है कि समर विजिटर अभी भी दिखाई रहे हैं।

इसमें तकरीबन 6 प्रजाति के पक्षी शामिल हैं। वहीं ठंड में आने वाले प्रवासी पक्षियों ने भी अपनी आमद दर्ज करा दी है। वन विहार में ठंड के प्रवासी पक्षियों को भी देखा जा सकता है।

पक्षी प्रेमी संगीता राजगीर का कहना है कि ठंड में आने वाले प्रवासी पक्षी हिमालय लेह-लद्दाख, यूरोप, साइबेरिया,मध्य एशिया से आते हैं। उन्होंने बताया कि व्हाइट ब्रोड वेज टेल के भेापाल दिखने का अर्थ है कि ठंड शुरू हो रही है। उन्होंने बताया कि ब्लैक रेड स्टार्ट, यूरेशियन मार्श हैरियट,पेलीड हैरियट, साइबेरियन स्टोन चैट, ओरियंटल टर्टल डैब , ब्लाइयश रीड, लेसर व्हाइट थ्रोट दिखने लगे हैं।

भोपाल की बर्ड वॉचर शोमी गुप्ता ने बताया कि इंडियन पिट्टा (नवरंगा), एशियन ब्राउन फ्लाइकैचर, ब्लेक हैडेड कुक्कू श्राइक, यूरेशियन ब्लैक बर्ड, इंडियन हॉक कुक्कू, जेकोबियन कुक्कू, शामिल हैं। ये पक्षी तेज गर्मी की शुरुआत के साथ ही भोपाल आ जाते हैं और जब बारिश होने लगती है तब यह लौट जाते हैं। ये पक्षी मई से जुलाई तक यहां रहते हैं।

इसलिए आते हैं यहां
अभी से आने लगे विंटर विजिटर
जुलाई में इन्हें लौट जाना था
केरवा डेम के पास दिखाई दिया साइबेरियन स्टोन चैट

भोपाल बर्ड्स के सदस्य मोहम्मद खालिक का कहना है कि गर्मी में ये पक्षी प्रजनन के लिए आते हैं। जून के शुरुआती दिनों में इनके अंडों से बच्चे निकल आते हैं। इस समय मौसम में आर्द्रता बनी होने के कारण इन्हें प्रोटीन-विटामिन युक्त भोजन मिल जाता है। कुछ पक्षियों को विशेष प्रकार की घास और उसके बीजों की आवश्यकता होती है, जो उन्हें अच्छी मात्रा में मिल जाते हैं।

हलाली डेम में जुकोबियन कुक्कू

केरवा डैम में अभी भी दिख रहे इंडियन कुक्कू


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