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जसरंगी जुगलबंदी में पेश किए एक ही गायन में अलग-अलग राग

3 वर्ष पहले
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भारत भवन के 36 वें वर्षगांठ समारोह में मुंबई से आईं गायिका अश्विनी भिड़े देशपांडे और पुणे से आए संजीव अभ्यंकर ने शास्त्रीय गायन में चुनौतीपूर्ण प्रस्तुति दी, जिसका नाम है, जसरंगी जुगलबंदी। संजीव मेवाती घराने से हैं, तो अश्विनी जयपुर घराने से। इन दोनों की जुगलबंदी इतनी बेहतरीन थी कि सुनने वालों को पता ही नहीं चला कि दोनों सिंगर अलग-अलग रागों पर गा रहे हैं। और तो और दोनों को अलग-अलग संगतकार भी संगत कर रहे थे।

इस तरह के गायन में अलग होती है सिंगर्स की पिच

यह जुगलबंदी मूर्छना पद्धति पर आधारित थी। जिसे महिला और पुरुष मिलकर प्रस्तुत करते हैं। एक ही समय पर गायन करते हुए दोनों गायकों के पिच और राग अलग-अलग होते हैं, लेकिन गायक इसे समान स्केल पर गाते हैं। भारतीय शास्त्रीय संगीत में इसे मूर्छना (राग के प्रत्येक स्वर को ‘सा’ मानकर आरोह अवरोह करने की क्रिया को) कहते हैं।

इस प्रस्तुति में राग ललित में शुद्ध धयवत (अश्विनी) और मध्यम से राग पूरिया धनाश्री (संजीव) ने प्रस्तुत किया। दोनों गायकों ने एक-दूसरे को बढ़ावा देते हुए अपने-अपने रागों के भीतर रहते हुए प्रस्तुति दी। इसके बाद राग दुर्गा की प्रस्तुति अश्विनी और मध्यम से राग भूपाली संजीव ने सुनाया। हालांकि प्रस्तुति देने से पहले उन्होंने श्रोताओं से कहा कि महिला और पुरुष की आवाज में जुगलबंदी सुनते हुए वे दोनों द्वारा गाए जा रहे रागों के अंतर पर न जाते हुए उस जुगलबंदी के एकत्रित परिणाम को सुनकर आनंदित हो। कार्यक्रम को सुनने बड़ी संख्या में संगीत प्रेमी पहुंचे। सभी ने इस जुगलबंदी को सराहा।

@ Bharat Bhawan

जसरंगी जुगलबंदी में अपने-अपने रागों की प्रस्तुति देते संजीव अभ्यंकर और मुुंबई से आईं अश्विनी भिड़े देशपांडे।

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