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योजना का उद्देश्य... मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस क्षेत्र के उद्योग लगाने वाले युवाओं को 10 लाख से लेकर 1 करोड़ रुपए तक के कर्ज उपलब्ध कराना

4 वर्ष पहले
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किस योजना के तहत कितने आवेदन आए
असर
बैंकों पर लोन देने या न देने का किसी भी तरह का कोई दबाव नहीं है...
वर्ष 2017-18

वर्ष 2016-17

कारण
दो मामले
लोन रिजेक्ट, फिर से करेंगे डीआईसी में आवेदन
बैंक रिजेक्ट कर रहे नौजवानों के लोन, तर्क- नहीं चल पाएगा उद्योग
मैकेनिकल ब्रांच से बीई कर चुके 25 साल के रणवीर सिंह गोविंदपुरा में जॉब वर्क इंडस्ट्रीज खोलना चाहते हैं। उन्होंने दो माह पहले मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत लोन के लिए आवेदन किया था, लेकिन उनका आवेदन बैंक ने यह कहकर लौटा दिया कि इस तरह के वहां पहले ही ढेरों उद्योग हैं। ऐसे में उनका उद्योग चल पाना मुश्किल है। रणवीर ने लोन एप्रूव होने की उम्मीद में प्रोजेक्ट के लिए करीब तीन लाख रुपए खर्च कर एक छोटा ट्रांसफार्मर और बिजली कनेक्शन ले लिया था। अब उसका हर माह 15 हजार रुपए बिल आ रहा है। ये कहानी अकेले रणवीर की नहीं है, उनकी तरह सैकड़ों युवाओं की यही परेशानी है।

ढेरों रियायत वाली मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत सरकार ने लोन देने या न देने का निर्णय बैंकों पर छोड़ दिया है। योजना का लक्ष्य इतना कम है कि बैंक भारी संख्या में आवेदन रिजेक्ट कर रहे हैं। हजारों लोगों ने रणवीर की तरह लोन मिलने की आस में 10 से 15 हार्सपॉवर के बिजली कनेक्शन ले लिए हैं, लेकिन औपचारिकताएं पूरी करने के बाद बैंक अनुभव में कमी और प्रोजेक्ट के भविष्य पर प्रश्न चिन्ह लगाकर आवेदन रिजेक्ट कर रहे हैं। इस योजना के तहत केवल 2000 लोगों को ही एक साल में लोन देने का लक्ष्य सरकार ने तय किया है, लेकिन जिला उद्योग और व्यापार केंद्र (डीआईसी) से हर साल बैंकों को 20 हजार आवेदन भेजे जाते हैं। डीआईसी को मिलने वाले आवेदनों की संख्या एक लाख से अधिक है।

कैसे करें आवेदन: यह आवेदन हर जिला कार्यालय में पूरी तरह फ्री मिलते हैं। आवेदन पत्र में आधी-अधूरी जानकारियां भरने वाले को बुलाकर पूरी जानकारी भरने को कहा जाता है। आवेदन के साथ प्रोजेक्ट की जनरल रिपोर्ट सम्मिट करना होती है।

जरूरतमंद ज्यादा
1.50 लाख युवा हर साल इंजीनियरिंग, मेडिकल और अन्य पाठ्यक्रमों से स्नातक होते हैं। सीबीएसई और एमपी बोर्ड से 12वीं पास करने वालों की संख्या 5 लाख से अधिक है। इनमें से 5 से 10% को ही नौकरी मिल पाती है। शेष बेरोजगार रह जाते हैं।

ऐसे देती है सरकार सहायता
इस योजना के तहत 10 लाख से 1 करोड़ रुपए तक के लोन प्रोजेक्ट की लागत के आधार पर सेंक्शन किए जाते हैं। सरकार सात साल तक प्रोजेक्ट के लिए मिले कर्ज पर 5 फीसदी की रियायती दर से कर्ज देती है। मौजूदा दरों पर सात साल तक गारंटी फीस भी दी जाती है।

योजना लक्ष्य स्वीकृत आवंटित

मुख्यमंत्री युवा उद्यम 48 07 2.03

प्रधानमंत्री रोजगार योजना 67 07 0.85

राशि (करोड़ रुपए में)

योजना लक्ष्य स्वीकृत आवंटित

मुख्यमंत्री युवा उद्यम 55 60 17.65

मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 1000 1012 57

प्रधानमंत्री रोजगार योजना 44 37 0.85

आसान नहीं
आवेदक का इंटरव्यू होता है। उसका अनुभव चेक किया जाता है। अगर वह मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट लगा रहा है तो उसके पास 10 से 15 हॉर्सपावर का बिजली कनेक्शन होना जरूरी है।

बैंकों के पास च्वाइस ज्यादा है। प्रदेश में बैंकों को 2000 लोगों को लोन देने का सालाना लक्ष्य है। इसकी तुलना में आवेदन 10 हजार से ज्यादा आते हैं। इसलिए बैंक के पास च्वाइस ज्यादा है। इसलिए वे अपनी सभी जरूरतों को पूरा करते हैं।

एक लाख लोग इस योजना के तहत आवेदन करते हैं। 20 हजार बैंकों के पास जाते हैं। 18 हजार आवेदन हो जाते हैं रिजेक्ट। रियायतों वाली युवा उद्यमी योजना के तहत लोन देने का फैसला बैंकों पर छोड़ा। लक्ष्य केवल 2000। इंटरव्यू और प्रोजेक्ट का भविष्य खंगालकर बैक ले रहे फैसला।

2. ऐसी कोई इंडस्ट्री मंडीदीप में नहीं है

इलेक्ट्रिकल इंजीनयरिंग कृष्णकांत चौरे मंडीदीप के सतलापुर में एक वेंडर इंडस्ट्री खोलना चाहते थे। प्रोजेक्ट की कुल लागत 44 लाख रखी गई थी। कैनरा बैंक में उन्होंने आवेदन किया था। बैंक ने यह कहकर आवेदन निरस्त कर दिया कि वे जो कलपुर्जे बनाना चाहते हैं, जिन्हें लेने वाली कोई इंडस्ट्री मंडीदीप में है ही नहीं।

1. बैंक को पसंद नहीं आई रिपोर्ट

नेहरू नगर निवासी राजेश गवलीकर ने रेस्तरां के लिए 20 लाख रुपए के लोन का आवेदन किया। उनका प्रकरण एसबीआई को दिया गया। बैंक को प्रोजेक्ट रिपोर्ट की डिटेल पसंद नहीं आई। उसने लोन रिजेक्ट कर दिया। अब वह दोबारा प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाकर जिला उद्योग और व्यापार केंद्र में मंजूरी के लिए जा रहे हैं।

बैंक केवल प्रकरण का निराकरण समय पर करें। इसकी मॉनिटरिंग एलडीएम और कलेक्टर करते हैं। बस अगर उन्होंने इस योजना के तहत लोन रिजेक्ट किया है तो उन्हें उसकी वजह बतानी होगी। गैर वाजिब वजह से कोई लोन रिजेक्ट न हो यह हम सुनिश्चित करते हैं। शरद श्रीवास्तव, लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (एलडीएम), भोपाल जिला

मप्र सरकार ने लोन का लक्ष्य कम रखा। अावेदन करने वाले 10 गुना ज्यादा और च्वाइस बैंकों को दी गई है। इंटरव्यू की प्रक्रिया लंबी। अनुभव की गहरी पड़ताल होती है। नए आवेदकों के पास अनुभव नहीं होता।

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