पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • ब्रेनडेड पेशेंट की जांच कर पांच सदस्यीय कमेटी करेगी मरीज के परिजनों की काउंसलिंग

ब्रेनडेड पेशेंट की जांच कर पांच सदस्यीय कमेटी करेगी मरीज के परिजनों की काउंसलिंग

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
जीएमसी डीन ने कहा
लिवर, किडनी ट्रांसप्लांट की अनुमति के लिए नहीं भटकेंगे परिजन
हमीदिया में 15 अप्रैल से शुरू होगा आॅर्गन डोनेशन रजिस्ट्री सेंटर
हमीदिया अस्पताल में 15 अप्रैल से सेंट्रल आॅर्गन डोनेशन रजिस्ट्री सेंटर शुरू होगा। यहां किडनी, लिवर और हार्ट डिसीज से पीड़ित मरीज ट्रांसप्लांट सर्जरी के लिए और इच्छुक डोनर अंगदान के लिए रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। मरीजों और डोनर्स का डेटा गांधी मेडिकल कॉलेज की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा। ताकि ट्रांसप्लांट सर्जरी का स्टेटस ऑनलाइन देखा जा सके।

जीएमसी प्रबंधन ने अस्पताल में कोमा की स्थिति वाले मरीजों के परिजनों की काउंसलिंग कर संबंधित को ब्रेनडेड घोषित करने के लिए डॉक्टरों की पांच सदस्यीय टीम बनाने की तैयारी भी कर ली है।

टीम में मेडिसिन, सर्जरी, कार्डियोलॉजी सहित दो अन्य विभागों के प्रमुखों को बतौर सदस्य शामिल किया जाएगा। यह टीम अस्पताल में भर्ती ब्रेनडेड पेशेंट की जांच कर, उनके परिजनों की काउंसलिंग करेगी। परिजनों द्वारा मरीज के अंगदान की मंजूरी दिए जाने पर आॅर्गन डोनेशन की प्रक्रिया भी यही टीम पूरी कराएगी। इसकी निगरानी कॉलेज डीन और अस्पताल अधीक्षक करेंगे।

अभी दो अस्पतालों में है ट्रांसप्लांट की सुविधा
आॅर्गन ट्रांसप्लांट के मामले में भोपाल अभी इंदौर से पीछे है। इंदौर में किडनी ट्रांसप्लांट के चार सेंटर हैं। लेकिन, भोपाल में यह सर्जरी केवल चिरायु मेडिकल कॉलेज और बंसल हॉस्पिटल में ही होती है। जबकि लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी की शुरुआत जुलाई में शहर के सिद्धांता रेडक्राॅस हॉस्पिटल में होगी।

रिसीवर नहीं होने पर दूसरे शहर भेजे जाएंगे आॅर्गन
डॉ. उल्का श्रीवास्तव ने बताया कि डोनेशन से मिली किडनी, लिवर और हार्ट को भोपाल, इंदौर में आॅर्गन रेसीपिएंट (वह मरीज जिसे किडनी, लिवर या हार्ट ट्रांसप्लांट किया जाना है) के नहीं होने पर, आॅर्गन देश के दूसरे शहर में भेजा जाएगा। इसके लिए अनुमति कलेक्टर से ली जाएगी।

नोटाे के निर्देश पर हुआ सेंटर बनाने का फैसला
आॅर्गन डोनेशन रजिस्ट्री सेंटर शुरू करने का निर्णय जीएमसी डीन डॉ. उल्का श्रीवास्तव ने नेशनल आर्गन एंड टिशु ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन (नोटो) के निर्देश पर किया है। रजिस्ट्री सेंटर शुरू होने से किडनी, लिवर, हार्ट की बीमारी के मरीजों को ट्रांसप्लांट सर्जरी की अनुमति लेने के लिए चिकित्सा शिक्षा संचालनालय और जीएमसी के बीच नहीं भटकना पड़ेगा।

खबरें और भी हैं...