850 करोड़ रुपए में सभी 85 वार्डों में मिलेंगी ‘स्मार्ट’ सुविधाएं
बाकी शहर के लिए भी काफी कुछ है
तुलसी नगर और शिवाजी नगर की लोकेशन स्मार्ट सिटी के लिए तय हो चुकी है। यह पूरे भोपाल का सिर्फ 300 एकड़ का इलाका है। जब यह सिटी आकार लेगी तब केंद्र सरकार की पैन स्मार्ट सिटी योजना शहर के बाकी हिस्से की शक्ल बदलेगी। इसके तहत पूरा शहर वाई-फाई होगा। मोबाइल नेटवर्क से कॉल ड्राप जीरो हो जाएगा। इंटिग्रेटेड स्मार्ट सिटी गवर्नेंस के तहत नगर निगम के कामकाज के ढंग को और आधुनिक बनाया जाएगा। कचरे के प्रबंधन की मॉनिटरिंग भी जीपीएस से होगी। सभी 85 वार्डों में होने वाले काम पर 850 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। योजना का मॉडल इस तरह से बनाया गया है कि न तो इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार से अतिरिक्त अनुदान लेना पड़ेगा और न ही किसी संस्था से लोन लेने की जरूरत पड़ेगी।
रकम कहां से आएगी?
निगम को स्मार्ट सिटी योजना के तहत केंद्र सरकार से पहली किस्त के रूप में 400 करोड़ मिलेंगे। इसमें से करीब 100 करोड़ रुपए पैन सिटी के लिए होंगे। योजना से जुड़े अफसर बताते हैं कि स्मार्ट सिटी योजना से निगम को 10 साल में इससे 3000 करोड़ की आय होगी। इसमें से पैन सिटी के साथ अन्य योजनाओं पर राशि खर्च होगी। अन्य योजनाओं की तरह यह योजना पूरी तरह अनुदान, लोन आदि पर निर्भर नहीं है, बल्कि यह निगम के लिए आय का स्रोत बनेगी।
यह सब सुविधाएं शुरू होने में पांच साल लगेंगे, जबकि तुलसी नगर -शिवाजी नगर की स्मार्ट सिटी का प्रोजेक्ट पूरा होने में दस साल लगेंगे।
Ãतुलसी नगर-शिवाजी नगर में भले ही स्मार्ट सिटी के रूप में डेवलपमेंट होगा मगर इतने बड़े भोपाल के बाकी इलाकों की शक्ल-सूरत ऐसी ही नहीं रहेगी। पैन सिटी योजना में बाकी शहर के लिए भी काफी कुछ है। जो हम अपने स्तर पर कर सकते हैं, वह कर ही रहे हैं। -आलोक शर्मा, महापौर
मंगलवार से मोबाइल कोर्ट
मंगलवार से सप्ताह में एक दिन बाजारों में मोबाइल कोर्ट घूमेगी। इसमें मौजूद म्युनिसिपल मजिस्ट्रेट अतिक्रमण, गंदगी आदि पाई जाने पर स्पाट फाइन करेंगे। करीब दस साल पहले यह व्यवस्था थी। बाद में बंद हो गई।
कचरे के कंटेनर पर संेसर हाेंगे
कचरे का प्रबंधन भी जीपीएस आधारित होगा। वाहनों पर जीपीएस उपकरण लगेंगे। कंटेनर पर सेंसर होंगे। कंटेनर में कचरा जमा होते ही कंट्रोल रूम को सूचना मिल जाएगी।
सवाल- 300 एकड़ में स्मार्ट सिटी तो बाकी शहर के लिए क्या और कब?, जवाब-