दूसरे राज्यों को भी पसंद आ रहा डायल 100 मॉडल
तीन राज्यों की पुलिस ले चुकी जानकारी
मप्र पुलिस की डायल 100 योजना को अब दूसरे राज्यों में भी सराहा जा रहा है। पंजाब, राजस्थान और उप्र पुलिस इस मॉडल की जानकारी यहां आकर ले चुकी हैं। सभी की दिलचस्पी यह जानने में है कि कैसे डायल 100 से हर स्तर पर लोगों की मदद की जा रही है।
एक नवंबर 2015 से करीब 632 करोड़ रुपए की इस योजना की शुरुआत की गई थी। फिलहाल प्रदेश के सभी जिलों में 800 फास्ट रिस्पॉन्स व्हीकल (एफआरवी) चलाई जा रही हैं। मौके पर पहुंचने के अलावा घायलों को अस्पताल पहुंचाने, मारपीट रुकवाने और डूबते को बचाने तक में इनकी मदद ली जा रही है। ये सब इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम से संचालित किया जा रहा है। एडीजी अन्वेष मंगलम के मुताबिक डायल 100 के इसी मॉडल को जानने के लिए अब तक तीन अन्य राज्यों के पुलिस अफसर भोपाल आ चुके हैं। इसके अलावा दक्षिण भारत के प्रदेशों से भी इस प्रोजेक्ट को समझने के लिए पुलिस अफसर फोन पर बात कर चुके हैं।
इस योजना को इसलिए भी सराहा जा रहा है, क्योंकि कम खर्च में ज्यादा सुविधा मुहैया कराई जा रही है। एक निजी कंपनी के वाहन, ड्राइवर और कॉल टेकर रहते हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल पुलिस की योजना में हो रहा है।
खुद के वाहन खरीदकर इतनी संख्या में स्टाफ को सरकारी अनुपात की तनख्वाह देना पुलिस के लिए महंगा सौदा साबित होता।
कम खर्च में ज्यादा सुविधा
उत्तर प्रदेश पुलिस ने तो टेंडर भी जारी कर दिए
सूत्रों के मुताबिक उप्र पुलिस ने हाल ही में प्रदेश स्तर पर एक ही कंट्रोल रूम बनाए जाने को लेकर टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। इससे पहले यहां चार जिलों में कंट्रोल रूम बनाए गए थे। इसके लिए डायल 100 प्रोजेक्ट के इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम के मॉडल को अपनाया जा रहा है। इस कंट्रोल रूम की खास बात ये है कि यहां से प्रदेश के किसी भी पुलिस अफसर तक आसानी से संदेश पहुंचाया जा सकता है। सभी 800 एफआरवी यहीं से ऑपरेट की जाती हैं।