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विज्ञान और अध्यात्म के रास्ते अलग लेकिन उद्देश्य सच की खोज

6 वर्ष पहले
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मानवता के लिए पूर्व और पश्चिम के ज्ञान को आपस में जोड़ना जरूरी
इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. जी माधवन नायर बोले- तार्किक, चिंतन और विश्लेषण पर केंद्रित है आधुनिक विज्ञान
आधुनिक विज्ञान की तुलना में वैदिक विज्ञान कहीं ज्यादा शक्तिशाली है। विज्ञान और अध्यात्म को लेकर पूर्व और पश्चिम की अवधारणा अलग-अलग है। लेकिन इसके बावजूद दोनों का परस्पर मिलना मानवता के लिए जरूरी है। अब नई पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वो विज्ञान और अध्यात्म को समृद्ध बनाने के लिए अागे आए।

रवींद्र भवन में विज्ञान और अध्यात्म पर पिछले तीन दिनों से चल रहे वैचारिक कुंभ के आखिरी दिन हुए मंथन में यह निष्कर्ष निकलकर सामने आया। रविवार को वेदांत एवं आधुनिक भौतिकी विषय पर आयोजित कार्यक्रम के आखिरी सत्र की अध्यक्षता कर रहे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. जी माधवन नायर ने कहा कि अध्यात्म और विज्ञान के बीच का संबंध अदभुत है। दोनों के रास्ते अलग हैं लेकिन उद्देश्य केवल एक ही है सत्य की खोज। आधुनिक विज्ञान तार्किक, चिंतन और विश्लेषण पर केंद्रित है।

उन्होंने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी ने नई संभावनाओं का विस्तार किया है। आज संचार सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरा है। यह आधुनिक विज्ञान की ही देन है। डॉ. नायर ने विज्ञान और अध्यात्म को समृद्ध बनाने के लिए नई पीढ़ी को अपनी सहभागिता बढ़ाने के लिए कहा है।

सेमिनार को संबोिधत करते इसरों के पूर्व अध्यक्ष डॉ. माधवन।

आत्मप्रियानंद

आरके मिशन विवेकानंद विश्वविद्यालय कोलकाता के कुलपति स्वामी आत्मप्रियानंद ने कहा मानवता के लिए पूर्व और पश्चिम के ज्ञान को आपस में जोड़ना होगा। विज्ञान और अध्यात्म के रिश्तों को समझने के लिए वैश्विक दृष्टिकोण की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जिस तरह अंधेरे को रोशनी के साथ नहीं मिलाया जा सकता वैसे ही विज्ञान को अध्यात्म के साथ मिलाना संभव नहीं है। स्वामी आत्मप्रियानंद ने आधुनिक भौतिकी में हुए नए अनुसंधानों की रोचक व्याख्या करते हुए कहा कि आधुनिक भाैतिकी के अनुसार प्रकृति सुंदर है। उसमें सत्यम, शिवम और सुंदरम के दर्शन होते हैं। हमारी जिम्मेदारी है कि विज्ञान का विकास केवल मानव जाति के ही न कर इसे प्रकृति की भलाई के लिए भी करें। स्वामी विवेकानंद योग एवं अनुसंधान संस्थान बेंगलुरू के प्रोफेसर एलेक्स हेंकी ने कहा कि पूर्व और पश्चिम में अध्यात्म की व्याख्या अलग-अलग तरीके से की जाए तो बायोलॉजिकल आर्गनिज्म अधिक पेचीदा नजर आएगा। समापन अवसर पर विज्ञान भारती के मेंटर शंकरराव तत्ववादी, विवेकानंद योग एवं अनुसंधान संस्थान बेंगलुरू के डॉ. एचआर नागेंद्र, मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक प्रो. प्रमोद कुमार वर्मा सहित अन्य मौजूद थे।