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शहर के मैरिज गार्डनों में अब सकारात्मक बदलाव

6 वर्ष पहले
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प्लास्टिक डिस्पोजल का 200 शादियों में नहीं हुअा इस्तेमाल
राजधानी के मैरिज गार्डनों में हो रहे प्रदूषण को रोकने की सरकारी कोशिशें भले ही फाइलों में उलझ गई हों, लेकिन चुनिंदा गार्डन संचालकों की छह महीने पहले शुरू हुई मुहिम अब रंग दिखाने लगी है। छह महीने में सात गार्डनों में ऐसी 200 से ज्यादा शादियां व अन्य कार्यक्रम हुए, जिनमें प्लास्टिक व थर्माकोल से बने डिस्पोजल का इस्तेमाल नहीं हुआ। यहां शादी की बुकिंग करने के लिए बुकिंगधारी और केटरर्स को यह शपथ पत्र देना होता है कि वे प्लास्टिक की सामग्री का इस्तेमाल नहीं करेंगे। यदि ऐसा किया तो उन्हें बिजली और पानी सप्लाई रोक दी जाएगी। शुरुआती दिनों में केटरर्स ने इसका विरोध भी किया, लेकिन अब इस मुहिम में केटरर्स भी शामिल हो गए हैं। गार्डन संचालक कहते हैं कि समारोह खत्म होने के बाद गार्डन से निकलने वाला कचरे में भी अब 50 फीसदी से ज्यादा की कमी आई है।

बैरागढ़ रोड स्थित सनसिटी गुड गार्डन सेलिब्रेशन के संचालक श्याम गोपलानी कहते हैं कि मैरिज गार्डन से होने वाले प्रदूषण को लेकर बार-बार एनजीटी की फटकार और प्रशासन के नोटिसों से तंग आ गए थे। फिर अपने स्तर पर ही कोशिश की। अब तक हुए 200 से ज्यादा कार्यक्रम में प्लास्टिक का उपयोग नहीं हुआ है।

फिलहाल यह व्यवस्था सनसिटी, लैंडमार्क, मूनलाइट, स्वागत, गुलशन, लॉयन सिटी, ग्रीन सिटी व सुंदरवन में लागू है। अब शहर के दूसरे मैरिज गार्डन संचालक भी बुकिंगधारियों को प्लास्टिक डिस्पोजल पर रोक के लिए तैयार कर रहे हैं।

ऐसे हुई शुरुआत
मई 2015 में एनजीटी ने मैरिज गार्डन से हो रहे प्रदूषण को आधार बनाते हुए जिला प्रशासन, नगर निगम और प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के अधिकारियों से इस पर अंकुश लगाने कहा। नए सिरे से सर्वे शुरू हुआ। कई मैरिज गार्डनों पर प्रदूषण व पार्किंग के पर्याप्त इंतजाम न होने से ताला लगा दिया। प्रदूषण नहीं फैलाने के लिए मैरिज गार्डन संचालकों से प्रति शादी समारोह 50 हजार रुपए का एडवांस डिपॉजिट लिया गया। इसी बीच कुछ गार्डन संचालकों ने यह मुहिम शुरू की।

प्रदूषण रोकने और पार्किंग के लिए खुद आए आगे
मैरिज गार्डन संचालकों ने गार्डन के सामने 45 फीट की सर्विस रोड बनाई। बारात मुख्य सड़क पर नहीं निकलती। ट्रैफिक जाम की झंझट नहीं।

बुकिंगधारी को शपथ पत्र देना होता है कि डीजे का शोर नहीं होगा, न ही डीजे से बारात आएगी।

कच्ची सब्जियों का बचा हिस्सा गॉटरी फार्म वाले खुद आकर लेने लगे। गार्डन संचालकों ने कुछ फॉर्म संचालकों से इसका अनुबंध कर लिया है कि दोपहर 3 बजे तक वे सब्जियों का बचा हिस्सा निशुल्क ले जा लें।