लिवर रोगियों को भी सरकार दे इलाज के लिए आर्थिक मदद
भोपाल |लिवर रोगियों की संख्या भोपाल सहित पूरे प्रदेश में तेजी से बढ़ रही है। सबसे ज्यादा मरीज हेपेटाइटिस-बी और सी के संक्रमण के बढ़ रहे हैं। इलाज महंगा होने के कारण हेपेटाइटिस-बी और सी के संक्रमण वाले 60 फीसदी मरीज अपना इलाज नहीं कराते। इस कारण दूसरी बीमारियों के मरीजों की तरह लिवर रोगियों को भी सरकारी खर्च पर इलाज देने का नियम राज्य सरकार बनाए। इसके लिए लिवर डिसीज को स्वास्थ्य विभाग राज्य बीमारी सहायता निधि में शामिल करे। यह प्रस्ताव शनिवार को इंडियन सोसायटी ऑफ गेस्ट्रो मेडिसिन एंड सर्जन्स की बैठक में हुआ।
इसमें भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर के 50 लिवर रोग विशेषज्ञ डॉक्टर शामिल हुए।
सोसायटी के सदस्य एवं हमीदिया अस्पताल के गेस्ट्रो फिजीशियन डॉ. आरके जैन ने बताया कि राज्य बीमारी सहायता निधि में लिवर से संबंधित एक भी बीमारी शामिल नहीं है। इस कारण लिवर, पेनक्रियाज और पेट संबंधी बीमारियों से पीड़ित मरीजों को इलाज खर्च खुद ही उठाना पड़ता है। इनमें से कई मरीज दवाएं महंगी आने के कारण आधा इलाज ही कराते हैं। इस व्यवस्था को बदलने स्वास्थ्य विभाग को सर्वे कराकर, सरकारी योजनाओं में इससे संबंधित बीमारियों को जोड़ना चाहिए। सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. सुबोध वार्ष्णेय ने बताया कि प्रदेश के अधिकांश सरकारी अस्पतालों में लिवर रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है। इस कारण मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों में इलाज कराने जाना पड़ता है। इन मरीजों को निशुल्क इलाज मुहैया कराने सरकार पेट से संबंधी बीमारियों के इलाज के लिए निजी अस्पतालों को अधिग्रहित करें। साथ ही इलाज खर्च का पेमेंट सरकार करे। इससे प्रदेश में लिवर रोगियों की बढ़ती संख्या को आसानी से नियंत्रित किया जा सकेगा।