पुणे से आए एसओएस के जोनल डायरेक्टर
बच्चों से इशारों मेंे पूछेंगे शिकायत की हकीकत
एसओएस बालग्राम के बच्चों के अश्लील वीडियो बनाए जाने का मामला सामने आने के बाद जांच के लिए एक सात सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। यह कमेटी दिव्यांग बच्चों से बातचीत कर उनके बयान लेगी। कमेटी में साइन लैंग्वेज जाने वाले दो सदस्यों को शामिल किया गया है। जो बच्चों से इशारों में पूछेंगे कि उनके साथ क्या अत्याचार हुआ है। जांच कार्रवाई पर नजर रखने के लिए पुणे के एसओएस बालग्राम के जोनल डायरेक्टर एम के लोकेश भोपाल पहुंच गए हैं।
बालग्राम प्रबंधन के खिलाफ आई शिकायत के बाद शनिवार को बच्चों काे बाहर नहीं निकलने दिया गया। यहां तक कि बच्चे परिसर में खेलने के लिए भी नहीं निकले। सूत्रों ने बताया कि प्रबंधन ने बच्चों पर दबाव भी बनाया कि किसने मीडिया को इंटरव्यू दिया है। बच्चे दिनभर सहमे रहे हैं। बालग्राम के कर्मचारियों ने बताया कि यौन शोषण के शिकार हुए बच्चों को देश की दूसरी संस्था में शिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है। इधर, बाल कल्याण समिति के सदस्यों का कहना है कि समिति पूर्व में हुए मामलों की भी जांच करेगी। पूर्व में नेशनल प्लेयर बच्ची के साथ हुई मारपीट की लंबित जांच शुरू कर दी है।
जांच से पल्ला झाड़ रहे दो जिम्मेदार विभाग
बच्चों का अश्लील वीडियो सामने आने के बाद अब महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय विभाग जांच से पल्ला झाड़ रहे है। सामाजिक न्याय विभाग की उप संचालक जकिया जावेद का कहना है कि एसओएस बाल ग्राम की जांच महिला सशक्तिकरण अधिकारी को करना चाहिए। वहीं जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारियों ने सामाजिक न्याय विभाग का मामला कहकर पल्ला झाड़ लिया है। उनका कहना है कि दिव्यांगों के मामले पहले सामाजिक न्याय विभाग देखता था। इसलिए जिम्मेदारी उसी की है।
पहले भी हुईं घटनाएं
नई बात नहीं है यहां बच्चों के साथ यौन शोषण
बाल आयोग की पूर्व अध्यक्ष उषा चतुर्वेदी का कहना है कि एसओएस बालग्राम में बच्चों के साथ यौन शोषण की यह पहली घटना नहीं है। पहले भी सामान्य बच्चों वाले एसओएस बालग्राम में रहने वाली नर्स के पति ने एक बच्ची के साथ ज्यादती की थी। मामला तूल पकड़ने के बाद नर्स के पति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इसकी शिकायत राष्ट्रीय बाल आयोग में भी हुई थी।