पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

इसलिए बने हालात

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
देश के छह एम्स पर एक नजर
इलाज में पीछे, विवादों में आगे... इंस्ट‌ीट्यूट बॉडी की 16 को होने वाली पहली बैठक टली, अब मार्च में होगी
भोपाल एम्स सबसे पीछे, सांसद ही 15 बार कर चुके हैं शिकायत
गंभीर बीमारियों के मरीजों को बेहतर इलाज देने के मामले में भोपाल एम्स देश के अन्य एम्स से पिछड़ गया है। आलम यह है कि भोपाल एम्स के साथ ही शुरू हुए देश के अन्य एम्स में हृदय रोगियों को एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी की सुविधा मिलने लगी हंै, जबकि यहां अब तक हृदय रोगियों का इलाज तो दूर मरीजों की जांच करने के लिए डॉक्टर्स की नियुक्ति तक नहीं हो सकी है। इसका खामियाजा हृदय, ब्रेन और ब्लड से संबंधित बीमारियों के मरीजों को निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराकर भुगतना पड़ रहा है। इन मामलों में भोपाल सांसद आलोक संजर ने करीब 15 शिकायतें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को की है। उन्होंने बताया कि अब मार्च में होने वाली इंस्टीट्यूट बॉडी की बैठक में इन मुद‌्दों को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के सामने रखा जाएगा।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अफसर भी स्वीकार कर रहे हैं कि देश में वर्ष 2013 में शुरू किए गए छह नए एम्स में भोपाल पिछड़ गया है। पटना, रायपुर और जोधपुर के संस्थानों में कार्डियक सर्जरी और सीटी स्कैन और इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी डिपार्टमेंट शुरू हो गए हैं। जबकि भोपाल में इन डिपार्टमेंट की शुरुआत अब तक नहीं हुई है।







इसकी पीछे बड़ी वजह संस्थान के बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन का काम एक साल पिछड़ना है।

पटना

कार्डियो थोरेसिक सर्जरी (एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी, बायपास सर्जरी), ज्वाइंट रिप्लेसमेंट क्लीनिक, ईएनटी डिपार्टमेंट में कॉकलियर इंप्लांट, सीटी , प्लास्टिक सर्जरी, ऑप्थेल्मोलॉजी, गायनेकोलॉजी, न्यूरो सर्जरी, ब्लड बैंक।

भुवनेश्वर

ऑनलाइन पेशेंट रजिस्ट्रेशन सिस्टम, डेंटिस्ट्री, आर्थोपेडिक्स, साइकियाट्री, मेडिसिन, जनरल सर्जरी, पल्मोनरी मेडिसिन गायनेकोलॉजी में सभी प्रोसीजर, ईएनटी , ऑप्थेल्मोलॉजी, कार्डियो थोरेसिक सर्जरी , ब्लड बैंक।

रायपुर

कार्डियक कैथ लैब (एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी), सीटी स्कैन, फेशियल सर्जरी, ब्लड बैंक, गायनिक ओटी, पीडियाट्रिक सर्जरी, नेत्र रोग विभाग, थैलीसीमिया, हीमोफीलिया मरीजों का इलाज करने ब्लड ट्रांसफ्यूजन यूनिट।

भोपाल- न्यूरोसर्जरी, डेंटिस्ट्री, आर्थोपेडिक्स में जनरल सर्जरी, साइकियाट्री, प्लास्टिक सर्जरी, पल्मोनरी मेडिसिन, गायनिक सर्जरी शुरू लेकिन डिलीवरी नहीं, पीडियाट्रिक मेडिसिन।

अंदरूनी राजनीति ले डूबी
भोपाल एम्स में चिकित्सा सेवाओं का विस्तार संस्थान में स्थाई डायरेक्टर के नहीं होने के कारण पिछड़ा है। पिछले 8 माह से यहां स्थाई डायरेक्टर की नियुक्ति नहीं हो सकी है। इसके लिए सांसद संजर ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की थी। उन्होंने एक महीने में डायरेक्टर की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने का आश्वासन दिया है। संजर ने बताया कि बीते डेढ़ साल में एम्स का कई बार निरीक्षण करने के बाद संस्थान के तत्कालीन और प्रभारी डायरेक्टर (दोनों अफसरों) को अंदरूनी राजनीति बंद कर, चिकित्सा सेवाओं के विस्तार के लिए कहा है। केंद्रीय स्तर पर करीब 15 शिकायतें भी की। इसके बावजूद कोई सुधार नहीं हुआ। संस्थान में नई मेडिकल सर्विसेस शुरू नहीं हो सकी हैं।

पत्र लिखकर बताई है स्थिति
देश में एक साथ शुरू हुए छह एम्स में भोपाल एम्स सुविधाओं के मामले में सबसे पीछे है। इस स्थिति से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखकर अवगत करा दिया गया है। सुविधाओं के मसले पर संस्थान के पिछड़ने की एक मुख्य वजह एम्स भोपाल में चल रही इंटरनल पॉलिटिक्स भी है। आलोक संजर, सांसद और सदस्य, गवर्निंग बॉडी, एम्स भोपाल

जोधपुर- ईएनटी कॉकलियर इंप्लांट यूनिट, कार्डियोलॉजी, सीटी स्कैन, फेशियल सर्जरी, ब्लड बैंक, गायनिक ओटी, पीडियाट्रिक सर्जरी, नेत्र रोग सर्जरी, ब्लड बैंक।

ऋषिकेश-कार्डियक सर्जरी, न्यूरो सर्जरी, डेंटिस्ट्री, साइकियाट्री, पल्मोनरी मेडिसिन, आर्थोपेडिक्स, मेडिसिन, गायनेकोलॉजी, पीडियाट्रिक सर्जरी , ब्लड बैंक और ट्रांसफ्यूजन यूनिट।

खबरें और भी हैं...