और फिर सरकारी हो गई मोदी की सभा
सीहोर के शेरपुर में 18 फरवरी को किसानों का महासम्मेलन सरकार कराएगी या भाजपा, इसे लेकर बनी असमंजस की स्थिति शनिवार रात साफ हो सकी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की प्रधानमंत्री से चर्चा के बाद तय हुआ कि सरकार ही इसका आयोजन करेगी। साफ है कि अब किसानों को सभा में लाने का खर्च भी कृषि विभाग करेगा। इससे पहले पीएमओ से मैसेज आया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 18 फरवरी को शेरपुर यात्रा ऑफिशियल नहीं हैं।
तीन दिन पहले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार ने कहा था कि किसानों का लाने का खर्च पार्टी उठाएगी। शनिवार को सीएम ने अफसरों की बैठक ली। इसके बाद मुख्यमंत्री ने नंदकुमार सिंह, संगठन महामंत्री अरविंद मेनन व प्रदेश उपाध्यक्ष विजेश लुनावत से बात की। इसमें स्पष्ट किया गया कि किसान सम्मेलन का यह आयोजन सरकार का नहीं, भाजपा का होगा। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से मैसेज आया है कि यह प्रधानमंत्री का ऑफिशियल टूर नहीं है। रात आठ बजे तक यही स्थिति थी, लेकिन फिर मुख्यमंत्री ने पीएम से बात की। उनकी स्वीकृति मिलने के बाद तय हुआ कि यह आयोजन अब पूरी तरह से सरकारी होगा।
सीहोर कलेक्टर ने खुद 28 कलेक्टरों को लिख दी चिट्ठी
केंद्र सरकार की फसल बीमा योजना के प्रचार के लिए हो रहे किसान महासम्मेलन की तैयारियों के बीच सीहोर कलेक्टर सुदाम खाड़े ने समकक्ष 28 जिलों के कलेक्टरों को सीधे पत्र लिखकर नया विवाद खड़ा कर दिया है। खाड़े ने दूसरे जिलों के कलेक्टरों से कहा है कि सम्मेलन की तैयारियों के संबंध में 15 फरवरी को बैठक रखी गई है। किसानों का लाने ले जाने और कम्युनिकेशन के लिए जो भी नोडल अधिकारी तैनात किए गए हैं, उन्हें सीहोर भेजें। कार्यक्रम स्थल शेरपुर में दोपहर 12 बजे मीटिंग होगी। इस बैठक में बताया जाएगा कि पार्किंग कहां होगी, ट्रैफिक कैसा रहेगा।
मैंने कमिश्नर से पूछकर ही कलेक्टरों को पत्र लिखा है। इसमें केवल सूचना दी गई है। -सुदाम खाड़े, कलेक्टर, सीहोर
यह प्रोटोकॉल का उल्लंघन है
यह सीधे तौर पर प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। कलेक्टर सीधे दूसरे जिलों के कलेक्टरों को पत्र नहीं लिख सकते। मोदी के कार्यक्रम को सफल बनाने की कोशिश में सीहोर कलेक्टर अपनी सीआर बढ़वाना चाहते हैं।
- अरुण यादव, अध्यक्ष, प्रदेश कांग्रेस
कलेक्टर सीधे नहीं लिख सकते
कलेक्टर दूसरे समकक्ष कलेक्टरों को सीधे कोई चिट्ठी नहीं लिख सकते। यदि मामले में ऐसा करना जरूरी भी था तो संबंधित विभाग या शासन के जरिए विषय में डायरेक्शन जिलों में जाने चाहिए थे।\\\' - निर्मला बुच, पूर्व मुख्य सचिव