फर्म के दस्तावेज भी फर्जी मैनेजर से होगी पूछताछ
बैंक ऑफ इंडिया (बीओआई) की मिसरोद शाखा में हुए सवा चार करोड़ के लोन घोटाले में नया खुलासा हुआ है। लोन के लिए जिन 16 फर्म के नाम और दस्तावेज लगाए गए, वे भी फर्जी हैं। इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लोन कैसे और क्यों जारी कर दिया गया, सीबीआई ने इन बिंदुओं को भी जांच में ले लिया है। इन फर्जी फर्म में फिलहाल स्वास्तिक इंटरप्राइजेस और आरजे इंटरप्राइजेस के नाम सामने आए हैं।
इस मामले में शुक्रवार को सीबीआई की टीम ने बैंक ऑफ इंडिया की मिसरोद शाखा में वर्ष 2013 में मैनेजर रहे पीयूष चतुर्वेदी के घर समेत 16 स्थानों पर सर्च की थी। आरोप है कि पीयूष ने बिचौलिए पंकज श्रीवास्तव और मोहन सोलंकी की मदद से इस गड़बड़ी को अंजाम दिया है। तीनों ने मिलकर 16 ऐसी फर्म के नाम पर लोन निकाल लिया, जिनके न तो नाम सही हैं और न ही दस्तावेज। बताया गया है कि इन फर्म को कैश क्रेडिट लिमिट की सुविधा दी गई थी।
स्क्रूटनी के बाद पीयूष से होगी पूछताछ
शुक्रवार देर रात तक चली सर्च में सीबीआई ने ढेरों दस्तावेज जब्त किए हैं। सूत्रों का कहना है कि पीयूष और उनके सहयोगियों के खिलाफ काफी सबूत हाथ लगे हैं। टीम ने शनिवार को इन दस्तावेजों की स्क्रूटनी की। टीम जल्द ही पीयूष समेत अन्य आरोपियों से पूछताछ करेगी।
मैनेजर का पुराना रिकॉर्ड
खंगाल रही सीबीआई
सीबीआई सूत्रों के मुताबिक ये गड़बड़ी उस दौरान हुई जब पीयूष मिसरोद शाखा में पदस्थ थे। सीबीआई को पता चला है कि इससे पहले वे चूना भट्टी और रायसेन रोड स्थित बैंक ऑफ इंडिया की शाखाओं में भी पदस्थ रह चुके हैं। इसलिए सीबीआई ने उनका पुराना रिकॉर्ड खंगालना भी शुरू कर दिया है। ये घोटाला उजागर होने के बाद पीयूष को निलंबित कर दिया गया था।