उच्च शिक्षा के लिए यह अनुशंसाएं
एनसीईआरटी के ज्वाइंट डायरेक्टर ने कहा- चार भाषाओं के विकास पर हो रहा काम
सिफारिश
यूजी तक संस्कृत अनिवार्य करने की तैयारी
यह होगी यूजीसी व एआईसीटीई की जिम्मेदारी
कक्षा 11वीं व 12वीं के साथ ही स्नातक स्तर पर भी कला, वाणिज्य व विज्ञान सहित अन्य सभी संकायों में संस्कृत भाषा वैकल्पिक विषय के रूप में अनिवार्य हो सकती है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा गठित उच्च स्तरीय कमेटी ने संस्कृत के विकास के लिए रोड मैप तैयार कर इसे जारी कर दिया है। खासकर विज्ञान संकाय में इसे वैकल्पिक भाषा के रूप में अनिवार्य करने पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। इसके लिए कमेटी ने अगले चार सालों में माध्यमिक शिक्षा अभियान और सर्व शिक्षा अभियान के तहत पांच लाख संस्कृत शिक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए मास्टर प्लान बनाने का सुझाव दिया है।
बरकतउल्ला विवि में आयोजित एक कार्यक्रम के सिलसिले में भोपाल आए नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एनसीईआरटी) के ज्वाइंट डायरेक्टर प्रो. बीके त्रिपाठी ने बताया कि इस समय एनसीईआरटी हिंदी, इंग्लिश, संस्कृत व उर्दू भाषा के विकास के लिए काम कर रही है। संस्कृत के विकास के लिए गठित कमेटी ने जो अनुशंसाएं की हंै उसकी स्टडी की जा रही है।
इन अनुशंंसाआें के आधार पर ही यूजीसी, एआईसीटीई, एनसीटीई के साथ ही एनसीईआरटी को अलग-अलग जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। एनसीईआरटी का काम राज्यों की संस्कृत पाठ्यपुस्तकों का अध्ययन कर एक कॉमन शब्दावली तैयार करना होगा।
साथ ही हर राज्य के सरकारी, निजी व अनुदान प्राप्त स्कूलों में संस्कृत शिक्षकों के स्वीकृत पदों का डाटा तैयार किया जाएगा।
प्रो. बीके त्रिपाठी
विशेष एक्शन प्लान व नई टीचिंग मैथडोलॉजी विकसित करना। राज्यों में स्थित संस्कृत विश्वविद्यालयों के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए एक ही बार में अनुदान की व्यवस्था करना। यूजीसी व नैक संस्कृत विवि व संस्थानों को दी जाने वाली मान्यता व अनुदान के लिए अलग नियम बनाना।
स्नातक स्तर पर विज्ञान व कॉमर्स में भी संस्कृत को शामिल करना। संस्कृत माध्यम से एमफिल, एमएड व पीएचडी कराना । संस्कृत में रिफ्रेशर व ओरियंटेशन प्रोग्राम शुरू करना।
जिन विवि में पोस्ट ग्रेजुएट विभाग है वहां संस्कृत में सांध्यकालीन कोर्स संचालित करना।
संस्कृत भाषा में जो भारतीय ज्ञान उपलब्ध है उसे विज्ञान, गणित, इतिहास सहित अन्य सभी विषयों में शामिल करना।
शिक्षकाें और छात्रों के लिए ब्रिज कोर्स शुरू करना।
राज्य बाेर्ड के साथ ही सीबीएसई, आईसीएसई, ओपन स्कूल, केंद्रीय विद्यालय व नवोदय विद्यालयों में हाई स्कूलों में तीन भाषा फार्मूला और हायर सेकंडरी स्कूलों में दो भाषा फार्मूला अनिवार्य करना।
बीएड और डीएड में संस्कृत मैथडोलॉजी विकसित करना।
संस्कृत में डीएड कोर्स शुरू करने का भी सुझाव