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सीआईडी के जरिए इंटरपोल से मांगी मदद

5 वर्ष पहले
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नेपाली तस्करों का स्थाई वारंट जारी
राजधानी में नकली नोट की तस्करी करने वाले नेपाली तस्करों गैसूल आलम और जौवाद आलम के खिलाफ अदालत ने स्थाई वारंट जारी कर दिया है। क्राइम ब्रांच ने ये वारंट सीआईडी के जरिए इंटरपोल को भेज दिए हैं। अब इंटरपोल की मदद से क्राइम ब्रांच दोनों आरोपियों को गिरफ्तार करेगी। क्राइम ब्रांच ने दिसंबर 2014 में नकली नोट की तस्करी करने के आरोप में दोनों को गिरफ्तार किया था।

फर्जी जमानतदारों ने दोनों की जमानत ले ली और तभी से वे फरार हैं। फर्जी जमानत लेने वाले जीवन सिंह को गिरफ्तार कर लिया था। उससे पूछताछ में पता चला कि भोपाल व आसपास की अदालतों में फर्जी जमानतदारों का गिरोह है। इस मामले में क्राइम ब्रांच ने शनिवार को 25वीं गिरफ्तारी की है। गिरोह के सरगना राजू मीणा समेत 24 आरोपी पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं। एएसपी शैलेंद्र सिंह चौहान के मुताबिक भैंसाखेड़ी, बैरागढ़ निवासी सिद्धनाथ सिंह राठौर की तलाश थी। वह राजू मीणा का मुंशी था। करीब 25 साल पहले सिद्धनाथ मप्र परिवहन विभाग में बस कंडक्टर था। उड़नदस्ते ने गड़बड़ी करते पकड़ा। विभाग ने जांच के बाद उसे बर्खास्त कर दिया था। तभी से वह राजू मीणा के साथ काम करने लगा। गिरफ्तारी के बाद उसे जेल भेज दिया है।

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