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बच्चों की फीस नहीं भर पाया था शशांक

5 वर्ष पहले
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बच्चों ने बंद कर दिया था स्कूल जाना
3 साल से बंद था पेट्रोल पंप
बहोरीबंद में परिवार को मारकर आत्महत्या करने वाले शशांक तिवारी ने बैरागढ़ स्थित साधु वासवानी कॉलेज से राजनीति विज्ञान से एमए किया था। शुरू से ही राजनीतक रुझान था। पहले कांग्रेस में सक्रिय रहे। इसके बाद भाजपा की सदस्यता ले ली। तभी कॉलेज में साथ पढ़ी क्रिश्चियन लड़की से 1997 में शादी करके ननिहाल बहोरीबंद में रहने लगा था। छोटे भाई शरण तिवारी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि शशांक बहोरीबंद में रहकर कटनी जिले की स्थानीय राजनीति में सक्रिय था। हाल ही में हुए जनपद पंचायत चुनाव में बहोरीबंद सीट से उसे जनपद सदस्य चुना गया था।

मामा नरेंद्र पुराणिक ने बताया कि करीब 3 साल से शशांक का पेट्रोल पंप बंद था, जिसे वह शनिवार को वसंत पंचमी के मौके पर शुरू करना चाहता था। हादसे के समय शशांक और उसके परिवार के अलावा कोई घर पर नहीं था। बहोरीबंद के एक भाजपा नेता ने बताया कि शशांक के पेट्रोल पंप की री-ओपनिंग की पूरी तैयारी कर ली थी। इसके कार्ड भी वह बांट चुका था।

शशांक के छोटे भाई शरण, मां के साथ परिवार सहित भोपाल में एयरपोर्ट रोड स्थित विजय नगर में रहते हैं। बहोरीबंद शिफ्ट होने के बाद से ही उसने परिवार के सदस्यों से दूरी बना ली थी। शरण के पड़ोसी महेश खरे ने बताया कि शशांक और शरण का परिवार चार साल पहले तक लालघाटी के नजदीक स्थित कैलाश नगर में रहता था। विजय नगर में दोनों का परिवार मकान बनाने के बाद शिफ्ट हुआ था। 22 फरवरी को छोटे भाई की शादी होने वाली थी, जिसके कार्ड भी बंट चुके थे।

22 फरवरी को होना

थी छोटे भाई की शादी
शशांक कुछ समय से आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। हालात इतने बिगड़ चुके थे कि एक साल से बच्चों की स्कूल फीस तक नहीं भरी थी। इसके चलते बच्चों ने स्कूल जाना बंद कर दिया था। उन्होंने खुद को घर में ही सीमित कर लिया था।

8 को था जन्मदिन-8 फरवरी को ही शशांक ने अपना जन्मदिन मनाया था। वह हर दो-तीन महीने में भोपाल आता था और अपने पुराने दोस्तों से मिलना कभी नहीं भूला।













एक मित्र ने बताया कि उसके व्यवहार से कभी नहीं लगा कि वह ऐसा कदम उठा सकता है। सब उसके व्यवहार के कायल थे। वह बहुत मिलनसार और भावुक था।

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