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तिब्बती मोमोज़ का देसी तंदूरी वर्जन

5 वर्ष पहले
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भोपाल जायकों का शहर है। यहां पुराने नवाबी जायकों के अलावा फ्यूजन और एक्सपेरिमेंटल फूड का भी तेजी से विस्तार हुआ है। ऐसा ही एक फ्यूजन मुझे इस बार के जायका पड़ाव पर मिला। अलग जायके की तलाश में मैं इस बार पहुंचा कोलार रोड स्थित कस्बा मल्टी कुजिन रेस्टोरेंट में। इस रेस्टोरेंट का नाम जितना देसी है, इंटीरियर भी उतना ही दिलचस्प। अब मुझे इंतजार था कुछ अलग स्वाद का। यहां मुझे मिला तंदूरी मोमो। नाम सुनते ही मैं समझ गया था कि ये फ्यूजन फूड के बेहतरीन उदाहरणों में से एक होगा। इस तिब्बती स्टीम्ड फूड को देसी स्टाइल में तंदूर करने से स्वाद निश्चित रूप से बदलना था। जब इसे परोसा गया तो मैंने पाया कि इसका टेक्सचर बहुत ही सॉफ्ट है। हालांकि खाने में यह गर्म मोमोज़ बेहद तीखे थे। लेकिन जायका लाजवाब था। इसके अंदर की स्टफिंग वही थी, जो मोमोज़ की होती है। यानी कटे हुए स्टीम्ड वेजीटेबल्स। लेकिन फ्राय करने की जगह इसे तंदूर में पकाया गया था, जिसकी वजह से ये हेल्दी भी हो जाते हैं।

तो जिन लोगों को स्टीम्ड मोमोज़ थोड़े कम पसंद आते हों, वे यहां का तंदूरी मोमो जरूर ट्राय करें। कस्बा के अनोखे इंटीरियर में बैठकर इस फ्यूजन डिश का स्वाद दोगुना हो जाएगा। वैसे यहां की अन्य डिशेज़ भी काफी टेस्टी थीं, जिन्हें चखा जा सकता है।

आनंद को खाने-पीने का शौक हमेशा से था। इसी शौक की वजह से वे इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट में प्रिंसिपल बने। अलग-अलग जायकों की तलाश में वे हमेशा रहते हैं।

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