जायका के 12,129 करोड़ में से 3,033 करोड़ रुपए लोन राज्य सरकार के नाम होगा। शेष 9,096 करोड़ रुपए का लोन मेट्रो रेल प्रोजेक्ट का क्रियान्वयन करने के लिए गठित कंपनी के नाम होगा। यानी राज्य सरकार का अनुदान भी जायका के लोन में शामिल है।
यात्री
चार लाख लोग करेंगे यात्रा
मप्र मेट्रो रेल कार्पोरेशन लिमिटेड के एमडी विवेक अग्रवाल ने बताया कि भदभदा-रत्नागिरि तिराहे और करोंद-एम्स इन दो रूट पर सबसे पहले मेट्रो ट्रेन चलेगी। इन रूट का कुछ हिस्सा 2018 तक तैयार हो जाएगा, ताकि उस डेमो रन किया जा सके। उम्मीद की जा रही है कि पहले चरण में 4 लाख लोग मेट्रो का उपयोग करेंगे। अभी करीब एक लाख लोग लो फ्लोर बसों का उपयोग करते हैं। मेट्रो के बावजूद इस संख्या में कमी नहीं आएगी।
लोन
मई-जून में होगा स्वीकृत
अग्रवाल ने बताया कि इस प्रोजेक्ट की डीपीआर हम केंद्र को भेजेंगे। केंद्र इसका परीक्षण कर इसे जायका को भेजेगी। अनुमान लगाया जा रहा है कि मई-जून तक जायका का लोन स्वीकृत हो जाएगा और उसके साथ ही टेंडर भी जारी हो जाएगा। दिल्ली मेट्रो जैसी कई बड़ी कंपनियां मेट्रो के टेंडर में भाग ले सकती हैं।
कंपनियों की खासियत... लाइट रेल व्हीकल से लेकर स्ट्रीट कार तक सब कुछ
हिताची- 1910 में स्थापित एक टोटल रेल सिस्टम साॅल्यूशन कंपनी है। हाई स्पीड, इंटरसिटी, मोनो रेल सिस्टम, मेट्रो सिस्टम, लाइट रेल व्हीकल और स्ट्रीट कार सब कुछ बनाती है।
कावासाकी-1896 में स्थापित कंपनी। हाई स्पीड ट्रेन, लोकोमोटिव, पैसेंजर कोच, मोनो रेल, फ्रेट व्हीकल आदि बनाती है। शिप, एयरोस्पेस आदि क्षेत्रों में भी काम करती है। कंपनी 1950 से भारत में काम कर रही है।
नियोन सिग्नलन-1928 में स्थापित। आटोमैटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम, प्लेटफाॅर्म स्क्रीन डोर और डिजास्टर अलार्म सिस्टम बनाती है। दिल्ली व चेन्नई मेट्रो में भी कंपनी ने काम किया है।
मित्सुबिशी इलेक्ट्रिक- 1921 में अस्तित्व में आई। रेलवे ट्रेक्शन सिस्टम यानी पॉवर सप्लाई की अग्रणी कंपनी है। जापान के ट्रेक्शन सिस्टम में 50 फीसदी भागीदारी है। भारत में दिल्ली, जयपुर, मुंबई, नवी मुंबई, हैदराबाद, बंगलुरू और चेन्नई में में मेट्रो के ट्रेक्शन सिस्टम मित्सुबिशी ने डेवलप किए हैं।