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भोपाल में मेट्रो का डेमो रन 2018 में, पहला चरण 2019 में होगा पूरा

5 वर्ष पहले
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भोपाल. मेट्रो प्रोजेक्ट के भदभदा-रत्नागिरि तिराहे और करोंद-एम्स वाले रूट का बड़ा हिस्सा वर्ष 2018 तक बनकर तैयार हो जाएगा। इस हिस्से पर ही डेमो रन होगा। भोपाल में 2019 और इंदौर में 2020 तक मेट्रो प्रोजेक्ट का पहला चरण पूरा हो जाएगा।
यह उम्मीद मुख्य सचिव अंटोनी डिसा और जापान से आए प्रतिनिधिमंडल के बीच हुई चर्चा में जताई गई। जापान के मिनिस्ट्री ऑफ इकॉनमी, ट्रेड एंड इंडस्ट्री और मिनिस्ट्री ऑफ लैंड, इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रांसपोर्ट एंड टूरिज्म के अधिकारियों के साथ चार निजी कंपनियों के प्रतिनिधि गुरुवार को भोपाल आए। जापानी प्रतिनिधिमंडल ने पहले मंत्रालय में मुख्य सचिव और उसके बाद नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय में अफसरों के सामने मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट से संबंधित प्रेजेेंटेशन दिया।
जापानी अधिकारियों ने अपने प्रेजेंटेशन में यह भी बताया कि जापान में मेट्रो ट्रेन अपनी स्पीड और सर्विस के कारण बहुत लोकप्रिय है। टोक्यो में साठ प्रतिशत लोग मेट्रो में सफर करते हैं। शेष 40 फीसदी बस या कार में सफर करते हैं।
जापान इंटरनेशनल कारपोरेशन एजेंसी (जायका) ने पिछले साल अक्टूबर में सिर्फ 0.3 प्रतिशत दर पर करीब 15 हजार करोड़ का लोन स्वीकृत किया है। प्रोजेक्ट से जुड़े अफसरों के अनुसार यह बैठक जापान के अनुरोध पर ही आयोजित की गई थी। जापानी कंपनियां अपनी विशेषताओं के बारे में मप्र के अधिकारियों से चर्चा करना चाहती थीं, ताकि यह तय किया जा सके कि जापानी कंपनियों से इस प्रोजेक्ट में क्या काम कराना है? जायका ने इस प्रोजेक्ट के लिए लोन में यह शर्त रखी है कि 30 फीसदी काम जापानी कंपनियों से कराना होगा।
सुबह 5 से रात 12 बजे तक चलेगी मेट्रो
मेट्रो रेल का समय सुबह 5 बजे से रात 12 बजे तक होगा। दोनों शहरों में 30-30 स्टेशन बनाए जाएंगे। इन स्टेशनों के आसपास पार्किंग और स्टेशन से शहर के अन्य हिस्सों में जाने के लिए ट्रांसपोर्ट उपलब्ध रहेगा।
मप्र में प्लांट लगाएंगी जापानी कंपनियां
मेट्रो प्रोजेक्ट में भागीदारी की इच्छुक चार कंपनियां हिताची, कावासाकी, नियोन सिग्नल और मित्सुबिशी इलेक्ट्रिक के प्रतिनिधियों ने अधिकारियों से वन टू वन चर्चा की। अधिकारियों ने इन कंपनियों से कहा कि वे जापान से यहां सामान भेजने की बजाय मप्र में ही प्लांट स्थापित करें। जापानी कंपनियों के अधिकारियों ने इस पर सैद्धांतिक सहमति दी है।
इसका एक बड़ा फायदा यह होगा कि मप्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
लागत
यहां 6962 करोड़ होंगे खर्च
भोपाल के मेट्रो प्रोजेक्ट पर पहले चरण में 6962 करोड़ और इंदौर में 8200 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। पूरे प्रोजेक्ट पर खर्च होने वाले 15,162 करोड़ का 80 फीसदी यानी 12,129 करोड़ रुपए जायका लोन के रूप में देगा। शेष राशि 3,033 करोड़ रुपए केंद्र सरकार का अनुदान होगा।
जायका के 12,129 करोड़ में से 3,033 करोड़ रुपए लोन राज्य सरकार के नाम होगा। शेष 9,096 करोड़ रुपए का लोन मेट्रो रेल प्रोजेक्ट का क्रियान्वयन करने के लिए गठित कंपनी के नाम होगा। यानी राज्य सरकार का अनुदान भी जायका के लोन में शामिल है।
यात्री
चार लाख लोग करेंगे यात्रा
मप्र मेट्रो रेल कार्पोरेशन लिमिटेड के एमडी विवेक अग्रवाल ने बताया कि भदभदा-रत्नागिरि तिराहे और करोंद-एम्स इन दो रूट पर सबसे पहले मेट्रो ट्रेन चलेगी। इन रूट का कुछ हिस्सा 2018 तक तैयार हो जाएगा, ताकि उस डेमो रन किया जा सके। उम्मीद की जा रही है कि पहले चरण में 4 लाख लोग मेट्रो का उपयोग करेंगे। अभी करीब एक लाख लोग लो फ्लोर बसों का उपयोग करते हैं। मेट्रो के बावजूद इस संख्या में कमी नहीं आएगी।
लोन
मई-जून में होगा स्वीकृत
अग्रवाल ने बताया कि इस प्रोजेक्ट की डीपीआर हम केंद्र को भेजेंगे। केंद्र इसका परीक्षण कर इसे जायका को भेजेगी। अनुमान लगाया जा रहा है कि मई-जून तक जायका का लोन स्वीकृत हो जाएगा और उसके साथ ही टेंडर भी जारी हो जाएगा। दिल्ली मेट्रो जैसी कई बड़ी कंपनियां मेट्रो के टेंडर में भाग ले सकती हैं।
कंपनियों की खासियत... लाइट रेल व्हीकल से लेकर स्ट्रीट कार तक सब कुछ
हिताची- 1910 में स्थापित एक टोटल रेल सिस्टम साॅल्यूशन कंपनी है। हाई स्पीड, इंटरसिटी, मोनो रेल सिस्टम, मेट्रो सिस्टम, लाइट रेल व्हीकल और स्ट्रीट कार सब कुछ बनाती है।
कावासाकी-1896 में स्थापित कंपनी। हाई स्पीड ट्रेन, लोकोमोटिव, पैसेंजर कोच, मोनो रेल, फ्रेट व्हीकल आदि बनाती है। शिप, एयरोस्पेस आदि क्षेत्रों में भी काम करती है। कंपनी 1950 से भारत में काम कर रही है।
नियोन सिग्नलन-1928 में स्थापित। आटोमैटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम, प्लेटफाॅर्म स्क्रीन डोर और डिजास्टर अलार्म सिस्टम बनाती है। दिल्ली व चेन्नई मेट्रो में भी कंपनी ने काम किया है।
मित्सुबिशी इलेक्ट्रिक- 1921 में अस्तित्व में आई। रेलवे ट्रेक्शन सिस्टम यानी पॉवर सप्लाई की अग्रणी कंपनी है। जापान के ट्रेक्शन सिस्टम में 50 फीसदी भागीदारी है। भारत में दिल्ली, जयपुर, मुंबई, नवी मुंबई, हैदराबाद, बंगलुरू और चेन्नई में में मेट्रो के ट्रेक्शन सिस्टम मित्सुबिशी ने डेवलप किए हैं।
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