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त्वचा की कोशिकाओं से मिलती जुलती है दक्षिण के मंदिरों की संरचना

5 वर्ष पहले
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भोपाल. दक्षिण भारत के विभिन्न शहरों में बने मंदिरों की संरचना मनुष्य की त्वचा की एपीथिलियन लेयर की कोशिकाओं से मिलती जुलती है। इन मंदिरों के वास्तुशिल्प का सूक्ष्मता से अध्ययन करने पर यह संरचना साफ नजर आती है।

यह जानकारी ब्रिटेन की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के जीव विज्ञानी डॉ. मदन थांगवेलू ने दी। वे रवींद्र भवन में शुक्रवार से आयोजित वैचारिक कुंभ में विज्ञान एवं अध्यात्म विषय पर बोल रहे थे।
उन्होंने बताया कि दक्षिण भारत में अलग-अलग स्थानों पर जो मंदिर स्थापित हैं उन्हें भी इस तरह से बनाया है कि वे पंचतत्व के सूचक के रूप में नजर आते हैं। चित्तूर जिले में श्रीकालहस्ती मंदिर वायु,
कांचीपुरम स्थित एकम्बरेश्वर मंदिर पृथ्वी, तमिलनाडु में अन्नामलाईयार मंदिर अग्नि, चिदंबरम स्थित थिल्लई नटराज मंदिर आकाश और त्रिचुरापल्ली में जम्बूकेश्वर मंदिर पानी के सूचक हैं। थांगवेलू ने कहा कि 2001 में वैज्ञानिकों ने जीनोम का सीक्वेंस पूरा कर लिया था। लेकिन देखा जाए तो मनुष्य की अध्यात्म यात्रा कोशिका और उसमें मौजूद मॉलीक्यूल से शुरू हो जाती है। हमारे शरीर में 72 हजार नाड़ियां हैं इनका अध्यात्म में कहीं न कहीं योगदान है। अगर लगातार एक सप्ताह तक प्राणायाम किया जाए तो इससे शरीर के अंदर जो परिवर्तन होता है उसका परिणाम अाध्यात्मिकता के रूप में दिखाई देने लगता है।
डॉ. कपिल तिवारी ने कहा कि इस धरती पर मन को खोजने वाले हम भारतीय दुनिया में पहले थे। लेकिन हमने मन काे विज्ञान नहीं बनाया। अपने को जाने बिना जो दुनिया जानेंगे वो संदिग्ध ही होगी।
धर्म और विज्ञान में संघर्ष पांच सदी पुराना
मप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, विज्ञान भारती नई दिल्ली और स्वामी विवेकानंद योग व अनुसंधान संस्थान बेंगलुरू के तत्वावधान में हो रहे कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आरएसएस के सह सरकार्यवाह डॉ.कृष्ण गोपाल ने कहा कि पश्चिम में 400-500 साल पहले ही विज्ञान और धर्म के बीच संघर्ष शुरू हुआ है।
बाद में यह माना गया है दोनों के रास्ते अलग हैं। उन्होंने कहा कि विज्ञान सभ्यता की तरह है जो परिवर्तनशील है, जबकि अध्यात्म संस्कृति की तरह है जो बदलती नहीं है। एक तरह से विज्ञान हमें स्वार्थी बनाता है। वहीं अध्यात्म देना सिखाता है। उन्होंने कहा कि अध्यात्म के बिना विज्ञान अंधा है और इसे अकेला छोड़ दें तो यह राक्षस बन जाएगा।
विज्ञान से आगे की बात करता है अध्यात्म
मुख्य वक्ता स्वामी विवेकानंद योग एवं अनुसंधान संस्थान बैंगलुरु के कुलाधिपति डॉ. एचआर नागेंद्र ने कहा कि आधुनिक विज्ञान चार सदी पहले शुरू हुआ है। जबकि अध्यात्म बताता है कि भौतिक विश्व के आगे क्या है। अध्यात्म प्राण, मन, बुद्धि और अहंकार से उपजी समस्याओं के समाधान की बात करता है।
अध्यात्म से आधुनिक समय की सारी चुनौतियों के समाधान ढूंढ़े जा सकते हैं। वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भौतिक प्रगति सुख के लिए पर्याप्त नहीं है। भौतिक प्रगति ने मानव को विकृति तक पहुंचा दिया है। अध्यात्म मनुष्य को जीवन के अंतिम लक्ष्य तक पहुंचाता है।
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