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आपातकालीन घंटी है लॉग ड्रम, इसे बजाने से पहले करते हैं डांस

5 वर्ष पहले
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भोपाल. अरुणाचल प्रदेश की वांग्चू जनजाती द्वारा लाए गए लॉग-ड्रम (खम) को इस बार इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय के मुक्ताकाश वीथि मंच पर प्रदर्शित किया गया है। यह फरवरी माह का विशेष प्रादर्श है। कार्यक्रम की शुरुआत वांग्चू जनजाती के पारंपरिक नृत्य से हुई।
35 कलाकारों ने पारम्परिक परिधानों से सुसज्जित होकर नृत्य में हिस्सा लिया। नृत्य के माध्यम से उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की, कि इस लॉग ड्रम को बनाने के लिए लकड़ी प्राप्त करने के कारण विभिन्न प्रकार के पक्षियों का आशियाना उजाड रहा है, इसके लिए आप हमें माफ करना।
उसके बाद वांग्चू समुदाय के नोक्कई वांगहाम ने लॉग ड्रम की उपयोगिता के बारे में बताया कि यह बहुउपयोगी प्रादर्श है। इससे निकलने वाली आवाज़ से समुदाय के लोग किसी विशेष प्रकार की घटनाओं के बारे में सूचनाएं प्राप्त करते हैं, जैसे किसी की मृत्यु का समाचार, मछली मारने, रोड बनाने, शिकार करने, त्यौहार मानाने आदि।
इन अवसरों पर लॉग ड्रम को बजाकर एक विशेष प्रकार की ध्वनी निकाली जाती है, जिससे लोग उस घटना के बारे में समझकर खुद अनुपालन करते हैं। असल में यह एक आपातकालीन घंटी है, जिससे बजाकर सूचना का संप्रेषण किया जाता है।
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