भोपाल. मप्र टूरिज्म के खाते से एक करोड़ 88 लाख रुपए निकालने वाले पांच साल से फरार फ्राड को आखिरकार एसटीएफ ने ईटानगर से धर दबोचा है। 25 हजार रुपए के इनामी को पकड़ने के लिए एसटीएफ को अरुणाचल प्रदेश व मेघालय में बीस बार दबिश देनी पड़ी।
इस मामले में एसटीएफ अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि दो फिलहाल फरार हैं।
मप्र टूरिज्म (एमपीटी) के खाते से नवंबर-दिसंबर 2010 में एक करोड़ 87 लाख 43 हजार 335 रुपए निकाले गए थे। ये रकम छह फर्जी चेक के जरिए ईटानगर से निकाली गई थी। बैंक से जानकारी मिली तो एमपीटी की ओर से एसटीएफ थाने में 22 दिसंबर 2010 को धोखाधड़ी का केस दर्ज करवाया गया। एसटीएफ के मुताबिक जांच हुई तो इस गड़बड़ी में एक बड़े गिरोह का हाथ होने की पुष्टि हुई। एसटीएफ ने सबसे पहले लिन्डुम टगर को गिरफ्तार किया, जिसके खाते में पूरी रकम ट्रांसफर हुई थी। इस मामले में आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें लिन्डुम तरक, चारू तापम, अजय सेठ, प्रदीप गोयल, हेमंत यादव, विमल विक्टर और संतोष कुमार शामिल थे। इन सभी की जमानत भी हो चुकी है।
कई सालों से गुवाहाटी में था
केस दर्ज होने के बाद से ही मूलत: ईस्ट चंपारण, बिहार निवासी 41 वर्षीय अमजद रेजा खान फरार चल रहा था। कई वर्षों से वह गुवाहाटी में रहता है। उसके पकड़ने की जिम्मेदारी डीएसपी अरुण कश्यप और उनकी टीम को सौंपी गई थी। अमजद की कॉल ट्रेस कर एसटीएफ की टीम ने 20वीं बार दबिश दी और गुवाहाटी से उसे धरदबोचा। बुधवार सुबह टीम उसे ट्रांजिट रिमांड पर लेकर भोपाल लौट आई। उसके खिलाफ 27 जनवरी 2011 को तत्कालीन डीजीपी एसके राउत ने 25 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था। एसटीएफ उसे गुरुवार दोपहर अदालत में पेश कर रिमांड पर लेगी।
अमजद गड़बड़ी का अहम किरदार
शाहपुरा निवासी हेमंत को एमपीटी का करीब पांच हजार रुपए कीमत का चेक हाथ लग गया था। इसके बारे में उसने बुलंदशहर निवासी अपने परिचित प्रदीप को बताया। प्रदीप ने अजय से इस चेक के जरिए नकली चेक बनवाने की बात की। फिर अजय ने विमल और संतोष से असली चेक की फोटो कॉपी के जरिए छह नकली चेक और बैंक की सील बनवा ली। अजय ने नकली चेक अमजद को ईटा नगर भेजे। अमजद ने चारू, तरक और टगर की मदद से खाते में रकम ट्रांसफर करवा ली। आरोपी जानते थे कि पूर्वी भारत के सात राज्य (सेवन सिस्टर्स) टैक्स फ्री हैं। इसलिए यहां बैंक से रकम भुनाने में ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ती।