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511 दिनों में 15 देश पैदल घूम चुके ये विदेशी, साथ रखते हैं स्टोव और मसाले

सफर के दौरान ही भोपाल के एक बाशिंदे से दोस्ती हुई और इसलिए मार्ता और बोरिस भोपाल आ गए।

Dainik Bhaskar

Jul 06, 2015, 12:15 AM IST
बुल्गारिया के बोरिस और स्पेन की मार्ता बुल्गारिया के बोरिस और स्पेन की मार्ता
भोपाल. ये हैं बुल्गारिया के बोरिस और स्पेन की मार्ता । दोनों 511 दिनों में 15 देशों की यात्रा करते हुए हाल ही में भोपाल पहुंचे हैं। इस दौरान मुश्किलों का सामना करते हुए उन्होंने अपने हौसले को जरा भी कम नहीं होने दिया। दोनों नवंबर तक पैदल भारत की यात्रा करेंगे। उसके बाद अपने घरों के लिए रवाना होंगे।
25 साल के बोरिस की मुलाकात 31 साल की मार्ता से बुल्गारिया में हुई थी। दोनों की सोच एक-सी थी। दोनों ही पूरी दुनिया घूमना चाहते थे। सो तय हुआ कि पैदल सफर करते हुए दुनिया देखेंगे और भारत में आकर अपनी यात्रा खत्म करेंगे। अपनी जिम्मेदारियां और सफर की तैयारी के लिए दो साल का समय तय किया गया। साल 2013 में दोनों मिले और 10 अक्टूबर को वहां से चल पड़े। 10 किमी चलते ही तेज बारिश का पहला पड़ाव मिला। जिसे देख कर थोड़ी घबराहट हुई पर फिर टेंट लगा कर रात काटी। सुबह होते ही फिर सफर शुरू किया। सफर शुरू करने के बाद पहला देश टर्की पड़ा। मंजिल इंडिया थी जहां हर हाल में पहुंचना था। एक-एक देश घूमते हुए कुल 14 सीमाएं पार कीं और 21 महीनों में 15 देश कवर किए। बोरिस कहते हैं, "यह सफर सुनने में जितना रोमांचक लगता है, असल में उतना ही कठिनाइयों भरा रहा। एक देश में हमारा सारा सामान चोरी हो गया, जिससे काफी नुकसान उठाना पड़ा। लेकिन हिम्मत न हारते हुए हमने फिर से सामान खरीदा और सफर जारी रखा।'
ताजिकिस्तान में मुश्किल से मिला खाना
मार्ता बताती हैं, "ईस्ट ताजिकिस्तान में खाने के लिए सबसे ज्यादा संघर्ष करना पड़ा। हम दोनाें ही शुद्ध शाकाहारी हैं और वहां ऊंट और रेत के अलावा दूर तक कुछ भी दिखाई नहीं देता था। पूरे एक हफ्ते तक हमने सिर्फ टमाटर और ब्रेड खाया। वैसे हम एक छोटा-सा स्टोव और कुछ मसाले साथ रखकर ही चलते हैं और अपना खाना खुद ही बना लेते हैं। साथ ही, थोड़े काजू भी रखते हैं। जहां खाना नहीं मिलता वहां इनसे काम चलाते हैं।'
बिल्ली मिली, जो आज भी साथ है
मार्ता बताती हैं, "म्यांमार में लोगों ने हमें एक बिल्ली भेंट की। यह छह महीने से हमारे साथ ही सफर कर रही है। इसके लिए अलग से परमिशन लेनी होती है, लेकिन अब यह हमारी साथी बन गई है। इसे मैं अपने साथ वापस लेकर जाऊंगी।'
इन देशों से होकर गुजरे
टर्की 2013, जॉर्जिया, आर्मेनिया (फरवरी 2014), इराक, ईरान (मार्च से मई 2014), तुर्कमेनिस्तान, कजाकिस्तान किर्गिस्तान (मई से अगस्त 2014), चीन (सितंबर से अक्टूबर 2014), थाईलैंड से म्यांमार (फरवरी 2015) और फिर भारत मार्च में पहुंचे।
पैदल या लिफ्ट लेकर पूरा किया सफर
ईरान के सफर के दाैरान रिफ्यूजियों ने काफी मदद की। वहां सीमाओं के आपसी मतभेदों के कारण हमें काफी घूमकर आना पड़ा। लगभग बीस हजार किमी ज्यादा पैदल चलना पड़ा। लेकिन हमने कभी पैसे देकर सफर नहीं किया। बहुत थक जाने पर या रास्ते सुनसान होने पर हम ट्रक, मैटाडोर आदि से लिफ्ट ले लेते थे।
अब भोपाल में रहेंगे दो महीने
सफर के दौरान ही भोपाल के एक बाशिंदे से दोस्ती हुई और इसलिए मार्ता और बोरिस भोपाल आ गए। अब लगभग दो महीने तक यहीं रहेंगे और मध्यप्रदेश के मनोरम स्थलों की पैदल यात्रा करेंगे। दिसंबर तक ये दोनों अपने देश लौट जाएंगे।
आगे की स्लाइड्स में देखिए इन विदेशी यात्रियों की फोटो।
marta and borris travelers reach india
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बुल्गारिया के बोरिस और स्पेन की मार्ताबुल्गारिया के बोरिस और स्पेन की मार्ता
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