भोपाल. नेवी में जॉब कर रहे एक युवक ने ओलिंपिक की तैयारी के लिए नौकरी को ही अलविदा कह दिया। अब वह इसकी तैयारी के लिए उज्बेकिस्तान जा रहे हैं।
उम्र-20 साल, 3 साल का करियर, 3 इंटरनेशनल, 2 नेशनल चैंपियनशिप में भागीदारी और खाते में 8 मेडल। जब-जब नेशनल लेवल पर पार्टिसिपेट किया, तब-तब मेडल अपने नाम किया।
जॉब से दिया इस्तीफा
मप्र को नेशनल-इंटरनेशनल लेवल पर कयाकिंग में रिप्रजेंट करने वाले सुमित की यह कामयाबी उन्हें प्रदेश में पहचान दिलाती है। इन्हीं उपलब्धियों से उन्हें इंडियन नेवी में जॉब मिली। चिलका में ट्रेनिंग के दौरान पहला नेशनल गेम मिस किया। सुमित नेशनल गेम की ट्रेनिंग के लिए विदेश जाना चाहते थे, लेकिन जॉब में रहते ऐसा संभव नहीं था। इसलिए उन्होंने जॉब से इस्तीफा दे दिया। अब उनकी नजर ओलिंपिक पर है। मार्च में ट्रेनिंग के लिए वह उज्बेकिस्तान जा रहे हैं। उनके कोच मयंक ठाकुर बताते हैं कि सुमित की परफॉर्मेंस देख फेडरेशन ने भी उन्हें ट्रेनिंग के लिए सपोर्ट किया है। उन्हें गोल्ड मेडलिस्ट और नेशनल टीम के मेंबर्स के साथ ट्रेनिंग का मौका मिलेगा।
इस खेल ने बढ़ाया हौसला
सुमित बताते हैं, "एक सामान्य परिवार के लिए नौकरी अहम होती है, लेकिन इस खेल ने मेरा इतना हौसला बढ़ाया है कि अब मैं सिर्फ ओलिंपिक के लिए खुद को तैयार करना चाहता हूं। इंटरनेशनल गेम्स के दौरान इंडोनेशिया में उज्बेकिस्तान के खिलाड़ियों से मिला, तो उनकी ट्रेनिंग का पता चला। फैमिली का फाइनेंशियल सपोर्ट और खुद की सेविंग्स से ट्रेनिंग पर विदेश जाने की हिम्मत जुटा पाया हूं।'
बॉक्सिंग से स्पोर्ट्स में आए
वह बताते हैं "पढ़ने में मैं कमजोर था तो मेरे बड़े भाई ने खेलने की सलाह दी। इसकी शुरुआत बॉक्सिंग से हुई लेकिन पहले ही दिन कोच ने मुझे कहा कि 17 की उम्र में तुम्हारा वजन बॉक्सर विजेंद्र कुमार की कैटेगरी में आता है। पानी में तैरने के शौक की वजह से मैंने इस खेल को चुना। इस गेम में मुझे कई मौके मिले और नेशनल गेम में अच्छा प्रदर्शन करने पर इंटरनेशनल खेलने का मौका मिला। इस खेल से ओलिंपिक में भारत को मेडल दिला सकता हूं। ट्रेनिंग इसलिए जरूरी है।'