भोपाल. कोलार की जनता अपने घरों में लगे नलों में पानी के आने का बेसब्री से इंतजार कर रही है। इसलिए केरवा पेयजल परियोजना की वर्तमान स्थिति को लेकर दैनिक भास्कर ने एक ग्राउंड रिपोर्ट तैयार की है।
इस रिपोर्ट के आधार पर ननि के अफसर जहां काम में ढिलाई के आरोप लगा रहे हैं, वहीं प्रोजेक्ट मैनेजर का कहना है कि समय सीमा में प्रोजेक्ट पूरा कर लिया जाएगा। इसके लिए संबंधित विभागों से सिर्फ सहयोग की उम्मीद है। यहां कहना गलत नहीं होगा कि कहीं न कहीं प्रोजेक्ट का काम संबंधित विभागों के वरिष्ठ अफसरों की लापरवाही के कारण धीमी गति से चल रहा है। सूत्रों की मानें तो नगर निगम में शामिल होने के बाद प्रोजेक्ट के डिजाइन में कुछ बदलाव किए गए हैं। हालांकि इन बदलाव का जनता को फायदा ही मिलेगा। इन बदलाव के चलते घरों की दूसरी मंजिल तक में पानी पहुंचने की योजना पर काम किया जा रहा है।
सेकंड प्लोर तक सप्लाई की योजना
प्रोजेक्ट के जब टेंडर हुए थे तब डिस्ट्रीब्यूशन लाइन 7 मीटर हेड पर एग्रीमेंट किया गया था। किंतु नगर निगम ने जनता की सुविधा को ध्यान में रखा और 7 मीटर हेड की जगह इसको 12 मीटर हेड कर दिया है। इसका लाभ जनता को इस प्रकार मिलेगा कि घरों की दूसरी मंजिल तक पानी पहुंच सकेगा। वह भी प्रेशर के साथ। अगर एेसा नहीं किया जाता तो हमेशा के लिए दूसरी व और ऊपर की मंजिल वालों को पानी के लिए परेशान होना पड़ता।
यहां भी अटका हुआ है मामला
इस प्रोजेक्ट के तहत पांच टंकियों का निर्माण किया जाना है। चार टंकियों का काम चल रहा है किंतु अब तक पांचवीं टंकी का काम शुरू नहीं हो सका है। इस मामले की पड़ताल में पता लगा है कि पांचवीं टंकी की लोकेशन चेंज हो गई है। जब इस संबंध में ननि अफसर से पूछा गया कि क्या लोकेशन चेंज हो चुकी है तो उनका जवाब था नहीं। उधर प्रोजेक्ट मैंनेजर आशीष द्विवेदी का कहना है कि लोकेशन चेंज होने के कारण डिजाइन चेंज हो चुका है। यह लोकेशन बैरागढ़ चीचली मस्जिद के पास रखी गई है।
9 महीने से रोक कर रखी है अनुमति
इस प्रोजेक्ट में सबसे महत्वपूर्ण काम ग्रेविटी लाइन डालने और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट शुरू करने का है। इन दोनों काम को शुरू करने से पहले फॉरेस्ट डिपार्टमेंट से अनुमति जरूरी है। इस अनुमति के लिए अप्रैल 2015 को सारी औपचारिकताएं पूरी की जा चुकी हैं। हैरत की बात यह है कि 9 महीने से अधिक समय गुजर गया है पर अभी तक अनुमति नहीं मिली है। उधर इस संबंध में ननि अफसरों का कहना है कि अगले हफ्ते तक अनुमति मिल जाएगी। ऐसे में सवाल उठता है कि अनुमति अब तक क्यों रोक कर रखी गई?