आईपीएस डटे, आईएफएस ने ज्वाइनिंग नहीं दी, आईएएस प्रभार लेकर बैठ गए

4 वर्ष पहले
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भोपाल. राज्य योजना आयोग के प्रमुख सलाहकार पद से फरवरी 2017 के पहले सप्ताह में 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी राजेंद्र मिश्रा को हटाकर उनके मूल विभाग पीएचक्यू भेजा गया। साथ ही प्रभार वित्त विभाग के सचिव (अब प्रमोशन लेकर प्रमुख सचिव हो गए) व 1993 बैच के आईएएस अधिकारी अनिरुद्ध मुखर्जी को दे दिया गया।
 
तबादले से नाखुश मिश्रा ने अपना पक्ष योजना एवं आर्थिक सांख्यिकी विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक खांडेकर के सामने रखा। फिर विभागीय मंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार को पूरी जानकारी दी गई। इसके बाद मिश्रा प्रमुख सलाहकार के पद पर ही रहे। अनिरुद्ध मुखर्जी इस दौरान आयोग गए ही नहीं। तब शासन स्तर पर तय हुआ कि जब तक नए प्रमुख सलाहकार व एक अन्य सलाहकार की नियुक्ति आयोग में नहीं होती। तब तक मिश्रा ही रहेंगे, लेकिन इसका आदेश नहीं निकाला गया। करीब एक माह बाद योजना आयोग में मप्र कैडर के 1988 बैच के दो आईएफएस अधिकारियों चितरंजन त्यागी और रमेश कुमार श्रीवास्तव को पदस्थ किया गया। रमेश कुमार ने प्रमुख सलाहकार के एक पद पर ज्वाइनिंग दी, लेकिन त्यागी जिन्हें प्रमुख सलाहकार बनाया गया था वे आयोग नहीं गए। फिलहाल वे लघु वनोपज संघ में एपीसीसीएफ हैं। वर्तमान में मिश्रा ही इस काम को देख रहे हैं। उनका आदेश निरस्त नहीं हुआ है।
 
प्रभार मुखर्जी के ही पास
मजेदार बात यह है कि गुरुवार को राज्य सरकार ने सात प्रमुख सचिवों के प्रमोशन का आदेश जारी किया। इसमें अनिरुद्ध मुखर्जी के नाम के साथ लिखे विभागीय दायित्वों में वित्त विभाग के साथ आयोग के प्रमुख सलाहकार का प्रभार भी है।
 
यह तो प्रशासनिक अराजकता है...
 मैं सरप्राइज हूं कि मेरे दायित्वों में आयोग के प्रमुख सलाहकार का प्रभार क्यों लिखा है? जब मुझे प्रभार दिया था उस दौरान आधे घंटे के लिए मैं आयोग गया था, फिर कभी नहीं गया। शायद राजेंद्र मिश्रा का आदेश वापस हो गया होगा? मुझे कोई जानकारी नहीं है। 
अनिरुद्ध मुखर्जी, प्रमुख सचिव, वित्त
 
 आदेश निकलने के कुछ समय बाद ही विभाग की ओर से कम्युनिकेट किया गया कि अभी और इंतजार करना है। मुझे आयोग का प्रमुख सलाहकार बनाया गया था। यह सही है कि उसके कैंसिल होने का आदेश नहीं निकला है। 
 - चितरंजन त्यागी, एपीसीसीएफ, लघु वनोपज संघ
 
जब कोई आदेश निकलता है तो उसका पालन होना चाहिए। अजीब स्थिति है यदि ऐसा हो रहा है तो। वैसे भी तीन सर्विसेज के लोगों को एक पद पर भेजना सवाल खड़ा करता है कि पद की उपयोगिता को लेकर कोई विचार नहीं किया जा रहा। 
 केएस शर्मा, पूर्व मुख्य सचिव
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