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4 साल से बल्लियों पर टिकी स्कूल की छत, नीचे में पढ़ रहे 86 बच्चे

4 वर्ष पहले
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बमोरी (गुना)/भोपाल. शुक्रवार को तेज बारिश के बीच गणेशपुरा गांव से गुजरते हुए जब यह स्कूल दिखा तो वहां रुकना ही पड़ा। अजीबो-गरीब दृश्य था। गांव में बने प्राइमरी स्कूल की छत को साधने के लिए जगह-जगह बल्लियां लगी हुईं थी। क्लास रूम में जाकर देखा तो वहां भी वैसा ही सीन था। 3-4 बल्लियां छत से टिकी हुई थीं। पूरा फर्श गीला था, क्योंकि क्लास रूम की छत बुरी तरह से टपक रही थी। पता लगा कि स्कूल के दो कमरों की छत इन्हीं बल्लियों के सहारे टिकी है। और यह हालत पिछले 4 साल से है। गिरने की कगार पर पहुंच चुके इस स्कूल में 86 बच्चे दर्ज हैं और अगर बारिश न हो रही होती तो कमरे में खड़े होने की भी जगह नहीं मिलती। 
 
 
पूर्व सरपंच ने घटिया निर्माण पर आपत्ति जताई तो शिक्षक ने कर दी थी थाने में शिकायत
इस स्कूल का निर्माण 2001 में शिक्षक पालक संघ ने कराया था। तब इस पर 2 लाख की लागत आई थी। पूरा काम संघ के सचिव और स्कूल के पूर्व हेडमास्टर मूलचंद वाल्मीकि ने करवाया। तत्कालीन सरपंच केदार सिंह लोधा ने बताया कि उन्होंने तभी इसके घटिया निर्माण को लेकर आपत्ति जताई थी। इस पर उक्त शिक्षक ने उलटे उनके खिलाफ थाने में हरिजन एक्ट के तहत शिकायत दर्ज करा दी। 
 
 
अधिकारी-नेता आकर चिंता जताते हैं और फिर भूल जाते हैं
गांव के लोगों का कहना है कि विधायक से लेकर जनपद सीईओ और शिक्षा विभाग के सभी अधिकारी इस स्कूल की हालत देख चुके हैं। वे यहां आकर चिंता जताते हैं और फिर भूल भी जाते हैं। स्कूल की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। बच्चे और शिक्षक भारी खतरे के बीच रोजाना इस स्कूल की छत के नीचे 6 घंटे बिताते हैं। 
 
 
सोमवार को जाकर स्कूल शिफ्ट कराऊंगा 
इस मामले में बीआरसी केसर सिंह भिलाला से बात की तो वे भी स्कूल की हालत से वाकिफ थे। पर चूंकि मामला मीडिया तक पहुंच गया है इसलिए उनके सुर थोड़े बदल गए। उन्होंने कहा कि वे सोमवार को ही स्कूल जाएंगे और गांव के किसी अन्य भवन में उसे शिफ्ट कराने का इंतजाम करेंगे। उन्होंने कहा कि हमने डीपीसी को इसका प्रस्ताव पहले ही बनाकर भेज दिया है।  विभाग के आला अधिकारियों को जब बार-बार यह जानकारी मिल रही है तो वे कुछ कर क्यों नहीं रहे हैं।
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