भोपाल. मोनिका छारी (बदला हुआ नाम)। देह व्यापार के लिए कुख्यात बेड़िया जाति में जन्म। बचपन से ही इस काम में धकेल दिया गया। कई साल इस दलदल में रही। कई हाथों में बेची गई। नारकीय जीवन से तंग आकर एक दिन आत्महत्या के इरादे से कुएं में छलांग लगा दी। एक व्यक्ति ने बचाकर एनजीओ तक पहुंचाया। जहां सम्मानजनक जिंदगी जीना सीखा। तब इस काम को छोड़ने का निर्णय किया। इसके बाद कई लड़कियों को यह गंदा काम छोड़ने के लिए तैयार किया।
इस बीच एक लड़के ने मुझे समझाया व अतीत के साथ अपनाया। हमने शादी कर ली। अब खुश हूं। एक बच्चा भी है। एनजीओ की मदद से 15 से अधिक लड़कियों को इस दलदल से निकालने में कामयाब हुई। माेनिका के संघर्ष की यह आपबीती शनिवार को समन्वय भवन में एक्शन एड स्वयंसेवी संस्था द्वारा आयोजित जनसुनवाई में सामने आई।
जनसुनवाई में ही एक नाबालिग किशाेरी की कहानी और भी मार्मिक है। अनपढ़ नाबालिग। आए दिन गांव का एक दबंग व्यक्ति उसका देह शोषण करता रहा। सड़कों पर लावारिस भटकती रही। एक दिन एक्शनएड की कार्यकर्ता ने पूरी बात सुनी और पुलिस में रिपोर्ट लिखाई। अब एक छोटा बच्चा है संस्था में रह रही है। किशोरी की पूरी व्यथा सुनने के बाद एडीजी अजाक डॉ. एसएल थाउसेन ने उसे 1 लाख 80 हजार रुपए की आर्थिक सहायता दिए जाने के निर्देश दिए। समन्वय भवन में आयोजित जनसुनवाई में पीड़ित 20 महिलाओं ने आपबीती सुनाई। इस दौरान जनसुनवाई में कई अफसर मौजूद रहे।
इस जनसुनवाई पैनल में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अजाक डॉ. एसएल थाउसेन, अनुसूचित जाति कल्याण विभाग की अभिरामी एनसीडीएचआर की कमला भसीन शामिल थी। इस अवसर पर शहर में ऑटो चलाने का प्रशिक्षण पा रही 9 युवतियों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर प्रदेश भर से विभिन्न स्वयं सेवी संस्थाओं के एक हजार प्रतिभागियों ने भाग लिया।
सरपंच भी पहुंची शिकायत लेकर
जनसुनवाई में हरदा पील्या कला की सरपंच ज्योति कटारे भी अपनी शिकायत लेकर पहुंची। उन्होंने पैनल को बताया कि उनके गांव में अभी तक सवर्ण ही सरपंच हुआ करते थे। उन्होंने सरपंच का चुनाव लड़ा और जीत गईं। इसके बाद तो उनका जीना हराम हो गया। वे गांव में कोई भी विकास कार्य नहीं होने देते। उनके साथ जातिसूचक शब्दों को प्रयोग किया जाता है। उन्हेंं सुरक्षा दिलाई जाए। पैनल ने उन्हे सुरक्षा दिलाए जाने का आश्वासन दिया।