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एम्स, इसरो और स्टेशन के लिए नहीं है सीधी बस सेवा
ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (एम्स) या भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) जैसे महत्वपूर्ण संस्थान आज भी राजधानी की महत्वपूर्ण और सबसे अच्छी मानी जाने वाली नगर वाहन सेवा से भेल के कई क्षेत्र से सीधे नहीं जुड़ पाए हैं। इनके आसपास तक लो फ्लोर बसें चल तो रही हैं, लेकिन उनकी संख्या इतनी कम है कि जरूरत पड़ने पर लोगों को दूसरा ही सहारा ढूंढना पड़ता है। एम्स से स्टेशन जाना या आना हो तो बस को न्यू मार्केट या अन्य किसी स्थान पर बदलना पड़ेगा।
रहवासियों के अनुसार एम्स इसरो जैसे महत्वपूर्ण स्थान तक आने जाने के लिए लो फ्लोर बसों को प्राथमिकता के आधार पर चलाना चाहिए। इसमें सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र है एम्स, जहां आने जाने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यहां पर इसके अलावा दूसरा कोई साधन नहीं है। लो फ्लोर बस को रास्ते में बदलने की जगह लोग ऑटो की सवारी करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। यहां आने वाली लो फ्लोर बस को रेलवे स्टेशन और एरोड्रम बैरागढ़ से जोड़ना चाहिए। इसी प्रकार अयोध्या नगर, पटेल नगर आने जाने के लिए बस का इंतजार करने की जगह लोग मिनी बस, आपे या ऑटो से सफर करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। कोकता में कई इंजीनियरिंग कॉलेज और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की उच्च पशु रोग प्रयोगशाला होने के बाद भी यहां एक भी लो फ्लोर बस नहीं आती जाती हैं।
भेलके सभी क्षेत्रों में अच्छी नहीं है स्थिति
एम्स,इसरो सहित भेल के अन्य सगी क्षेत्र में नगर वाहन सेवा को लेकर अच्छे अनुभव नहीं है। अवधपुरी तक बस सुविधा अन्य स्थानों की अपेक्षा बेहतर मानी जाती है, लेकिन यहां बीडीए सहित कई कॉलोनियां ऐसी हैं, जहां से अगर लो फ्लोर बस पकड़ना हो तो तीन से चार किलोमीटर दूर तक आना पड़ेगा। जबकि अवधपुरी के पास ही खजूरी कलां रोड पर लो फ्लोर बस का रूट ही नहीं बनाया गया, जिससे 28 से 30 बड़ी कॉलोनियों के रहवासियों को सिर्फ स्वयं के वाहन पर निर्भर रहना पड़ता है। कटारा हिल्स उसके आसपास रहने वालों को काफी देर तक बसों का इंतजार करना पड़ता है। जेके रोड भवानी धाम, निजामुद्दीन कॉलोनी जैसे क्षेत्रों को अभी तक लो फ्लोर बसों का सुख नहीं मिल पाया है। लोगों को इंतजार है िक यहां से भी लो फ्लोर बसों की आवाजाही शुरू हो।
>यहां रहने वालों बाहर से आने वालों को हो रही है परेशानी >जानकारी होने के कारण भटक जाते हैं बाहर से आने वाले लोग >भे