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फ्यूजन इमेजिंग मशीन का इंस्टॉलेशन अटका

7 वर्ष पहले
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हमीदियाअस्पताल में मरीजों को 4 करोड़ 52 लाख रुपए की फ्यूजन इमेजिंग मशीन का लाभ मिलने में अभी समय लगेगा। जिम्मेदारों ने बिना तकनीकी पहलुओं को समझे लैब में लाखों रुपए का रेनोवेशन करा लिया, जबकि मशीन रखने के लिए मजबूत बेस होना चाहिए। अब लैब में लगी टाइल्स तोड़कर कांक्रीट का बेस तैयार करने में 8 लाख रु. खर्च होंगे। यह बेस 20 फीट लंबा, 9 फीट चौड़ा होगा।

फ्यूजन इमेजिंग टेक्नोलॉजी में दो मशीन से काम किया जाता है। इसमें गामा कैमरे से बीमारी की पहचान नहीं होने पर सीटी स्कैन से भी इमेज लेते हैं। फिर इसकी थ्री डायमेंशन इमेज बनती है। इसके बाद दोनों इमेज को मिलाकर एक इमेज बनती है। इससे बीमारी की सटीक जानकारी मिलती है। इससे शरीर के किसी भी अंग में कैंसर और 206 हड्डियों में से किस हड्डी में बीमारी है, आसानी से पता लग जाएगा।

इसलिएभी लग सकता है समय

भाभाएटोमिक रिसर्च सेंटर की गाइडलाइन अनुसार मशीन लगाने की प्रक्रिया होती है। मशीन लाने की अनुमति भी वहीं से मिलती है। इसके चार चरण होते हैं। पहले चरण में मशीन इंस्टॉलेशन के लिए बनी लैब के ले-आउट का अनुमोदन लेना होता है। फिर मशीन के इंस्टॉलेशन की प्रक्रिया शुरू होती है। तीसरी स्टेज में मशीन का प्री-कमीशनिंग इंस्पेक्शन होता है। इसमें सेंटर की टीम आकर मशीन के इंस्टॉलेशन से लेकर लैब की खिड़की-दरवाजे, दीवार सहित पूरे नार्म्स का इंस्पेक्शन करती है। इसमें मशीन पर काम करने वाले स्टाफ की योग्यता भी चेक की जाती है। इसके बाद ही मशीन को शुरू करने की परमिशन मिलती है। अभी यहां पर एसी, सीसीटीवी कैमरे, दरवाजे और फ्लोर का काम बाकी है। इससे लगता है कि फिलहाल मशीन के उपयोग में समय लगेगा।

लंबे समय से मशीन पैक रखी हुई है। इनसेट में वह रूम जहां फर्श उखड़ेगा।

इंस्टॉलेशन का काम शुरू हो गया

मशीनगई है। इसके इंस्टॉलेशन का काम शुरू हो गया है। इसके बाद मरीजों को इसका लाभ मिलने लगेगा। इस मशीन से मरीज की बीमारी के स्तर की सटीक जानकारी मिल सकेगी।

डॉ.करण पिपरे, प्रोफेसर,न्यूक्लीयर मेडिसिन